Nepal India Border Dispute: नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह के एक बयान ने भारत-नेपाल संबंधों और सीमा विवाद को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। संसद में दिए गए बयान में शाह ने दावा किया कि कुछ स्थानों पर नेपाल ने भी भारतीय जमीन पर कब्जा किया है। उनके इस बयान के बाद दोनों देशों के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई।
संसद में उठाया पुराना सीमा विवाद का मुद्दा
बालेन शाह ने कहा कि भारत-नेपाल सीमा से जुड़े कई क्षेत्रों में वर्षों से दोनों देशों के नागरिक खेती और निवास करते रहे हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि 1816 की सुगौली संधि से जुड़े सीमा विवाद के समाधान में भारत और नेपाल के अलावा ब्रिटेन तथा चीन की भूमिका भी हो सकती है। हालांकि इस बयान पर नेपाल में ही विपक्ष और पूर्व राजनयिकों ने सवाल उठाए हैं।
भारत ने तीसरे पक्ष की भूमिका को किया खारिज
भारत के विदेश मंत्रालय ने नेपाल के दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया कि भारत-नेपाल सीमा विवाद पूरी तरह द्विपक्षीय मुद्दा है और इसमें किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं हो सकती। मंत्रालय ने कहा कि दोनों देशों के बीच लगभग 98 प्रतिशत सीमा का सीमांकन पहले ही हो चुका है और शेष मुद्दों के समाधान के लिए स्थापित तंत्र मौजूद हैं।
गंडक नदी के बदलते बहाव से पैदा होती हैं जटिलताएं
विदेश मंत्रालय के अनुसार सीमा संबंधी अधिकांश तकनीकी समस्याओं की जड़ गंडक (नारायणी) नदी है, जो कई हिस्सों में भारत और नेपाल की सीमा निर्धारित करती है। समय के साथ नदी का मार्ग बदलने से जमीन की स्थिति और सीमांकन प्रभावित होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसी वजह से कई बार सीमा को लेकर भ्रम की स्थिति बन जाती है।
बातचीत और सर्वेक्षण से समाधान की कोशिश
भारत और नेपाल दोनों ने स्वीकार किया है कि कुछ क्षेत्रों में “नो-मैन्स लैंड” और सीमांकन से जुड़े तकनीकी मुद्दे मौजूद हैं। इन्हें सुलझाने के लिए दोनों देशों की संयुक्त टीमें सर्वेक्षण और मैपिंग का काम कर रही हैं। भारत ने दोहराया है कि सभी विवादों का समाधान आपसी बातचीत और कूटनीतिक प्रक्रिया के जरिए ही निकाला जाएगा।