Jamshedpur: "गलती की है, कानून के तहत ₹10,000 का जुर्माना भी भर दिया। लेकिन क्या चालान कटने के बाद मुझे बीच सड़क पर सरेआम शराब पीने की कानूनी आजादी मिल जाती है? क्या अब मैं 24 घंटे तक बेधड़क होकर ड्रिंक एंड ड्राइव कर सकता हूं?" यह सवाल सोनारी निवासी संजय सिंह ने जमशेदपुर पुलिस और जिला प्रशासन के सामने खड़े किए हैं। सर्किट हाउस साईं बाबा मंदिर के पास (मैरीन ड्राइव से सोनारी जाने वाले मोड़ पर) एंटी-क्राइम चेकिंग के नाम पर हुए इस कथित घटनाक्रम ने जमशेदपुर पुलिस की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
कैमरा ऑन होते ही नौ दो ग्यारह हुई पुलिस, चेकिंग छोड़ भागे जवान
पीड़ित संजय सिंह के अनुसार, वे मैरीन ड्राइव की तरफ से आ रहे थे, तभी साईं मंदिर के पास पुलिस ने उन्हें ड्रिंक एंड ड्राइव चेकिंग के लिए रोका। एक बियर पीने की बात स्वीकार करने पर पुलिस ने उन पर ₹10,000 का भारी-भरकम जुर्माना ठोक दिया। संजय ने बताया कि उन्होंने कानून का सम्मान करते हुए फाइन भर दिया, लेकिन जैसे ही उन्होंने पुलिसकर्मियों की कार्यशैली और वहां मौजूद अन्य गाड़ियों को बिना चेकिंग छोड़े जाने पर सवाल उठाकर वीडियो बनाना शुरू किया, चेकिंग दल में अफरा-तफरी मच गई। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि पुलिसकर्मी और उनकी गाड़ियां मौके से अचानक गायब होने लगीं। संजय ने आरोप लगाया, "मुझसे तो पैसे ले लिए गए, लेकिन कैमरा ऑन होते ही पुलिस वाले इस तरह भागे जैसे उन्होंने खुद कोई अपराध किया हो। मेरे जैसे न जाने कितने आम लोगों को यहाँ इस तरह प्रताड़ित किया जाता होगा।"
परमिशन मिल गई है, अब डीसी ऑफिस के सामने पीऊँगा- अनोखा और तीखा विरोध
इस पूरी घटना से आहत और आक्रोशित संजय सिंह ने विरोध का एक ऐसा मानवीय और अनोखा तरीका अपनाया जिसने राहगीरों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने पुलिस की गाड़ी के ठीक बगल में अपनी गाड़ी लगाई, हाथ में शराब की बोतल और गिलास लिया और कहा, "पुलिस वालों ने मुझसे कहा कि अब तुमने चालान भर दिया है, अब रात के 12 बजे तक आराम से रोड पर खड़े होकर पीयो, हम कुछ नहीं बोलेंगे। जब मुझे 24 घंटे का लाइसेंस मिल ही गया है, तो मैं अब अधिकारियों के सामने ही पीऊँगा।" इसके बाद संजय सिंह जिला मुख्यालय (डीसी कार्यालय) के ठीक सामने पहुंच गए और अपनी कार खड़ी कर बीच सड़क पर शराब पीने लगे। यह विरोध पुलिसिया रवैये के खिलाफ एक आम नागरिक की बेबसी और गुस्से का सीधा सबूत है।
एसएसपी और डीसी से सीधे सवाल- "मेरा पैसा सरकार के खाते में गया या किसी की जेब में?"
संजय सिंह ने जमशेदपुर के वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) और उपायुक्त (DC) से इस पूरे मामले पर उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने सीधे सवाल दागते हुए कहा है:
- जब ऑनलाइन माध्यम से ₹10,000 का चालान काटा गया और मैंने उस पर हस्ताक्षर किए, तो वीडियो बनते ही पुलिसकर्मी अपनी ड्यूटी छोड़कर क्यों भाग खड़े हुए?
- क्या पुलिस का काम केवल चुन-चुनकर सॉफ्ट टारगेट ढूंढना और उनसे वसूली करना है? बाकी गाड़ियाँ वहाँ से बिना चेकिंग के कैसे पार हो रही थीं?
- मुझे इसकी पूरी जानकारी चाहिए कि मेरी गाढ़ी कमाई का यह पैसा सरकार के राजस्व खाते में जमा हुआ है या चेकिंग में लगे कथित पुलिसकर्मियों की जेब में गया है?
सामाजिक सुधार के लिए उठाई आवाज, जांच की मांग
संजय सिंह का कहना है कि वे अपनी गलती से मुकर नहीं रहे हैं, लेकिन जिस तरह से पुलिस ने उनके साथ बर्ताव किया और बाद में अपनी जवाबदेही से भागती नजर आई, वह किसी भी सभ्य समाज के लिए सही नहीं है। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ उनके ₹10,000 की नहीं है, बल्कि उस भ्रष्ट सिस्टम के खिलाफ है जो नियम कानून के नाम पर आम जनता का शोषण करता है। अब देखना यह है कि इस वायरल वीडियो और स्थानीय नागरिक के इन गंभीर आरोपों के बाद जमशेदपुर पुलिस प्रशासन दोषी कर्मियों पर क्या एक्शन लेता है।