Jharkhand: नगर विकास विभाग द्वारा वर्ष 2018 में संविदा के आधार पर जूनियर इंजीनियरों की नियुक्ति के लिए जारी विज्ञापन के बावजूद आज तक नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। करीब आठ वर्ष बीत जाने के बाद भी किसी अभ्यर्थी को नियुक्ति नहीं मिली है, जिससे हजारों बेरोजगार इंजीनियरों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
141 पदों पर होनी थी नियुक्ति
सितंबर 2018 में जारी विज्ञापन के तहत जूनियर इंजीनियर के कुल 141 पदों पर नियुक्ति प्रस्तावित थी। इनमें 93 पद सिविल इंजीनियरिंग, 23 पद इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग और 25 पद मैकेनिकल इंजीनियरिंग के लिए निर्धारित किए गए थे। नियुक्ति राज्य सरकार की आरक्षण नीति और निर्धारित आयु सीमा के अनुसार की जानी थी।
बिना लिखित परीक्षा के होना था चयन
विज्ञापन में स्पष्ट किया गया था कि चयन प्रक्रिया के लिए किसी प्रकार की लिखित परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी। उम्मीदवारों का चयन गठित समिति के माध्यम से किया जाना था। चयनित अभ्यर्थियों को नगर विकास विभाग, मुख्य अभियंता कार्यालय, कार्यपालक अभियंता कार्यालय, नगर निगमों तथा अन्य शहरी निकायों में तकनीकी कार्यों के निष्पादन में सहयोग की जिम्मेदारी सौंपी जानी थी।
10 हजार से अधिक अभ्यर्थियों ने किया था आवेदन
आवेदन के लिए सिविल, इलेक्ट्रिकल या मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा अनिवार्य रखा गया था। संविदा पर नियुक्त जूनियर इंजीनियरों के लिए 28,755 रुपये मासिक मानदेय निर्धारित किया गया था। आवेदन शुल्क 2,000 रुपये रखा गया था और आवेदन की अंतिम तिथि 5 नवंबर 2018 तय की गई थी।
विज्ञापन जारी होने के बाद 10 हजार से अधिक बेरोजगार इंजीनियरों ने आवेदन किया। इसके माध्यम से सरकार के पास आवेदन शुल्क के रूप में दो करोड़ रुपये से अधिक राशि जमा हुई।
नियुक्ति भी नहीं, शुल्क वापसी भी नहीं
अभ्यर्थियों का आरोप है कि आठ वर्ष बीत जाने के बावजूद विभाग ने नियुक्ति प्रक्रिया को अंतिम रूप नहीं दिया है। वहीं दूसरी ओर न तो विज्ञापन को औपचारिक रूप से रद्द किया गया है और न ही आवेदन शुल्क लौटाने को लेकर कोई निर्णय लिया गया है। लंबे समय से नियुक्ति का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार को इस मामले में स्पष्ट स्थिति सामने लानी चाहिए। उनका कहना है कि यदि नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं की जानी है तो कम से कम आवेदन शुल्क वापस किया जाए और मामले पर आधिकारिक निर्णय लिया जाए।
सरकार के रुख पर टिकी निगाहें
करीब आठ वर्षों से लंबित इस नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर हजारों बेरोजगार इंजीनियर अब भी उम्मीद लगाए बैठे हैं। ऐसे में सभी की निगाहें नगर विकास विभाग और राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं कि आखिर इस लंबित भर्ती प्रक्रिया का क्या भविष्य होगा।