CBSE New Chairman: केंद्र सरकार ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) में एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए बोर्ड के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का तबादला कर दिया है. सरकार ने इन दोनों बड़े पदों पर नए अधिकारियों की तैनाती भी कर दी है. वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारी लोखंडे प्रशांत सीताराम को सीबीएसई का नया चेयरमैन (प्रमुख) नियुक्त किया गया है, जबकि सीनियर ब्यूरोक्रैट वरुण भारद्वाज बोर्ड के नए सचिव होंगे. कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने इस बड़े फैसले पर अपनी मुहर लगा दी है.
नए अफसरों की प्रोफाइल और ट्रांसफर की डिटेल्स
सीबीएसई की कमान संभालने से पहले लोखंडे प्रशांत सीताराम गृह मंत्रालय के गृह विभाग में अतिरिक्त सचिव (Additional Secretary) के पद पर तैनात थे. वहीं, निवर्तमान चेयरमैन राहुल सिंह को अब कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के तहत कृषि एवं किसान कल्याण विभाग में अतिरिक्त सचिव बनाया गया है. दूसरी तरफ, शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग के प्रस्ताव पर उच्च शिक्षा विभाग के निदेशक वरुण भारद्वाज को हिमांशु गुप्ता की जगह लैटरल शिफ्ट के तहत नया सचिव नियुक्त किया गया है. सेंट्रल स्टाफिंग स्कीम के तहत प्रतिनियुक्ति (Deputation) पर उनकी यह नियुक्ति 19 सितंबर 2027 तक (कुल 5 साल का कार्यकाल) के लिए की गई है.
ऑन-स्क्रीन मार्किंग टेंडर की जांच के लिए कमेटी गठित
प्रशासनिक बदलावों के साथ ही सरकार ने सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सेवाओं की खरीद और टेंडर प्रक्रिया की जांच के लिए एक विशेष जांच समिति का गठन किया है. पिछले कुछ समय से सीबीएसई के मूल्यांकन (इवैल्यूएशन) के तरीके, कॉपियों को जांचने के इस डिजिटल सिस्टम और इससे जुड़े टेंडर को लेकर लगातार कई गंभीर सवाल उठ रहे थे. छात्रों और अलग-अलग संगठनों ने भी इस मामले में पारदर्शिता लाने और जवाबदेही तय करने की मांग की थी, जिसे देखते हुए सरकार ने यह कड़ा कदम उठाया है.
एस. राधा चौहान करेंगी अगुवाई, 1 महीने में देनी होगी रिपोर्ट
इस हाई-लेवल जांच समिति की कमान कैपेसिटी बिल्डिंग कमिशन (CBC) की चेयरपर्सन एस. राधा चौहान को सौंपी गई है. सरकारी आदेश के अनुसार, एस. राधा चौहान को ओएसएम सिस्टम से जुड़े सभी मामलों की बारीकी से पड़ताल करने की जिम्मेदारी दी गई है. वे अपनी जरूरत के हिसाब से दूसरे विभागों और दफ्तरों के अधिकारियों की मदद भी ले सकेंगी, जबकि उन्हें सेक्रेटेरियल सपोर्ट कैपेसिटी बिल्डिंग कमेटी द्वारा ही दिया जाएगा. सरकार ने इस कमेटी को सख्त निर्देश दिया है कि वे अपनी पूरी जांच रिपोर्ट एक महीने के भीतर कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को सौंप दें.