Adityapur: एस टाइप चौक के पास दुकानों को हटाए जाने और कथित रूप से जेसीबी चलाकर क्षति पहुंचाने के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। बीते दिनों दुकानदारों ने शंभू नाथ सिंह और उनके सहयोगियों पर दुकानों को तुड़वाने का आरोप लगाया था। इसी विवाद को लेकर गुरुवार को आदित्यपुर स्थित शेरे पंजाब चौक के समीप एक कार्यालय में शंभू नाथ सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपना पक्ष रखा।
दुकान तोड़ने के आरोपों से किया इनकार
प्रेस वार्ता के दौरान शंभू नाथ सिंह ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने किसी दुकान को नहीं तुड़वाया है। उनके अनुसार, केवल उनकी निजी जमीन की सफाई कराई गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे मामले को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की जा रही है।
शंभू नाथ सिंह ने पूर्व मुख्यमंत्री एवं सरायकेला विधायक चंपाई सोरेन पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि मेयर और डिप्टी मेयर चुनाव के दौरान चंपाई सोरेन की ओर से समर्थन मांगा गया था। समर्थन नहीं देने के कारण अब उनके खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकारों द्वारा दुकानों को हटाने के संबंध में पूछे गए सवाल पर शंभू नाथ सिंह ने कहा कि कार्रवाई जिला प्रशासन द्वारा की गई थी।
एसडीओ और थाना प्रभारी के बयान से बढ़ा विवाद
मामले में नया मोड़ तब आया जब कुछ दिन पहले अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) अभिनव प्रकाश ने दूरभाष पर बातचीत में कहा था कि दुकानदारों को हटाने को लेकर प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई थी और न ही इस संबंध में कोई निर्देश जारी किया गया था। वहीं आदित्यपुर थाना प्रभारी विनोद तिर्की ने कहा था कि उन्हें शंभू नाथ सिंह नामक व्यक्ति द्वारा दुकानों पर जेसीबी चलवाने की सूचना मिली थी। दोनों अधिकारियों के बयानों के बाद मामले को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
दुकानदारों ने लगाया लाखों के नुकसान का आरोप
स्थानीय दुकानदारों का आरोप है कि शंभू नाथ सिंह के कहने पर उनके सहयोगियों द्वारा जेसीबी चलाकर दुकानों को नुकसान पहुंचाया गया। उनका कहना है कि इस घटना में उन्हें लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। दुकानदारों ने यह भी आरोप लगाया कि सूचना मिलने के बावजूद न तो जेसीबी को जब्त किया गया और न ही अब तक किसी के खिलाफ ठोस कार्रवाई हुई है।
प्रशासनिक जांच पर टिकी निगाहें
बता दें कि कुछ दिन पहले दुकान हटाने को लेकर हुए विवाद का वीडियो भी सामने आया था, जिसमें दुकानदारों और संबंधित पक्षों के बीच तीखी बहस देखी गई थी। घटना के समय पुलिस भी मौके पर पहुंची थी। अब इस पूरे मामले में लोगों की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि दुकानों को हटाने या तोड़ने का आदेश किसने दिया, कार्रवाई किसके निर्देश पर हुई और इसके लिए जिम्मेदार कौन है। प्रशासनिक जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।