Ranchi News : पूर्व मंत्री और तमाड़ के तत्कालीन विधायक रमेश सिंह मुंडा की हत्या से जुड़े बहुचर्चित मामले में झारखंड हाई कोर्ट ने नक्सली राम मोहन सिंह मुंडा उर्फ मोचू को जमानत दे दी है। वर्ष 2016 से जेल में बंद मोचू को करीब दस साल बाद इस मामले में राहत मिली है।
सरकारी गवाह बनने के बाद जमानत याचिका हुई स्वीकार
हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने उसकी जमानत याचिका स्वीकार कर ली। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि आरोपी को पहले ही सरकारी गवाह (एप्रूवर) बनाया जा चुका है और उसका बयान भी दर्ज हो चुका है। साथ ही मामले का ट्रायल लंबे समय से चल रहा है।
वहीं एनआईए की ओर से अदालत को बताया गया कि कानून के तहत एप्रूवर को ट्रायल पूरा होने तक हिरासत में रखने का प्रावधान है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने जमानत प्रदान कर दी।
2008 में हुई थी पूर्व मंत्री की हत्या, 2017 में बनाया गया था एप्रूवर
यह मामला बुंडू थाना कांड संख्या 65/2008 से संबंधित है। 9 जुलाई 2008 को तमाड़ के तत्कालीन विधायक और पूर्व मंत्री रमेश सिंह मुंडा की नक्सलियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस घटना के बाद पूरे राज्य में सनसनी फैल गई थी। बाद में मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंप दी गई थी।
एनआईए ने राम मोहन सिंह मुंडा को 8 जुलाई 2016 को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद से वह न्यायिक हिरासत में जेल में बंद था। जांच के दौरान 23 नवंबर 2017 को उसे सरकारी गवाह बना लिया गया था। इसके बाद उसने जांच एजेंसी के समक्ष अपना बयान दर्ज कराया।
इस चर्चित मामले में पूर्व मंत्री राजा पीटर और कुख्यात नक्सली कुंदन पाहन समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ अभी भी ट्रायल जारी है। हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद मामले को लेकर राजनीतिक और कानूनी हलकों में एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है।