PoK Protests: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) एक बार फिर अशांति और हिंसा की आग में झुलस रहा है। नागरिक संगठन जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद रावलकोट समेत कई इलाकों में हालात बेकाबू हो गए। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़पों में 27 लोगों की मौत हो गई, जबकि 70 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं।
पूर्ण बंद के आह्वान के बीच बिगड़े हालात
9 जून को क्षेत्रव्यापी बंद के आह्वान के दौरान तनाव और बढ़ गया। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, एक JAAC कार्यकर्ता के शव को अस्पताल की मोर्चरी में रखे जाने के बाद बड़ी संख्या में समर्थक वहां जुट गए। भीड़ को हटाने के लिए पुलिस और अर्धसैनिक बलों की कार्रवाई के बाद स्थिति हिंसक हो गई और कई स्थानों पर टकराव शुरू हो गया।
सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों में हुई गोलीबारी
पूंछ सेक्टर के कमिश्नर सरदार वहीद खान ने बताया कि हिंसा के दौरान कुछ उपद्रवियों ने सुरक्षा बलों पर गोलीबारी की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई की गई। पुलिस प्रमुख लियाकत मलिक के मुताबिक, 23 सुरक्षाकर्मी और लगभग 50 प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं। हालात नियंत्रित करने के लिए कई लोगों को हिरासत में भी लिया गया है।
आरक्षित सीटों का मुद्दा बना आंदोलन की वजह
इस आंदोलन की मुख्य वजह विधानसभा में 12 आरक्षित सीटों को लेकर लिया गया निर्णय बताया जा रहा है। 45 सदस्यीय विधानसभा में ये सीटें अन्य क्षेत्रों में रहने वाले शरणार्थियों के लिए आरक्षित की गई हैं। स्थानीय संगठनों का आरोप है कि इससे क्षेत्र के मूल निवासियों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व कमजोर होगा और स्थानीय मुद्दों पर उनका प्रभाव घटेगा।
मानवाधिकार आयोग ने जताई गंभीर चिंता
पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग ने पूरे घटनाक्रम पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। आयोग का कहना है कि किसी सामाजिक आंदोलन को आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत प्रतिबंधित करना उचित नहीं है। आयोग ने केंद्र और क्षेत्रीय सरकारों से संवाद शुरू कर तनाव कम करने तथा शांतिपूर्ण समाधान निकालने की अपील की है।
चुनाव से पहले बढ़ी सुरक्षा, विदेशी देशों की चेतावनी
27 जुलाई को होने वाले महत्वपूर्ण चुनावों से पहले प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। कई इलाकों में मोबाइल डेटा सेवाएं बंद कर दी गई हैं और बड़ी सभाओं पर रोक लगा दी गई है। वहीं ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा ने अपने नागरिकों के लिए ट्रैवल एडवाइजरी जारी कर प्रदर्शन स्थलों से दूर रहने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी है।