पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी ने बढ़ाई नेतृत्व की चुनौती
तृणमूल कांग्रेस पिछले कुछ समय से लगातार राजनीतिक झटकों का सामना कर रही है. पार्टी के कई नेताओं और जनप्रतिनिधियों के अलग रुख अपनाने के बाद संगठन के भीतर असंतोष की स्थिति गहराती दिखाई दे रही है. इसी बीच एक हफ्ते के भीतर तीन सांसदों के राज्यसभा और पार्टी से इस्तीफा देने की खबरों ने सियासी हलकों में हलचल बढ़ा दी है. इसके बाद पार्टी की संसदीय ताकत भी प्रभावित हुई है.
रिपोर्टों के मुताबिक, पार्टी छोड़ने वाले कुछ नेताओं की भाजपा नेताओं से मुलाकात के बाद उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर अटकलें भी तेज हो गई हैं.
ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले कल्याण बनर्जी ने दिखाए कड़े तेवर
टीएमसी के वरिष्ठ सांसद और ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले कल्याण बनर्जी ने इस बार खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की है. उन्होंने कहा कि अभिषेक बनर्जी और उनके बीच अब साथ काम करना संभव नहीं है. उनका कहना है कि पार्टी नेतृत्व को अब दोनों में से किसी एक को चुनना होगा.
कल्याण बनर्जी ने कहा कि उन्होंने ममता बनर्जी से स्पष्ट तौर पर कह दिया है कि या तो अभिषेक बनर्जी को पार्टी में रखा जाए और उन्हें बाहर जाने दिया जाए, या फिर उन्हें पार्टी में रखा जाए और अभिषेक को हटाया जाए. उनके मुताबिक, दोनों का एक साथ पार्टी में बने रहना अब संभव नहीं है.
आखिर किस बात से नाराज हैं कल्याण बनर्जी
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कल्याण बनर्जी की नाराजगी की एक बड़ी वजह हाल में घटी एक कानूनी घटना है. बताया जा रहा है कि अभिषेक बनर्जी ने अपने एक मामले की पैरवी के लिए कलकत्ता हाई कोर्ट में एक अपेक्षाकृत जूनियर वकील को चुना, जबकि इससे पहले इस मामले की पैरवी कल्याण बनर्जी कर रहे थे.
इस फैसले से वे खुद को आहत महसूस कर रहे हैं. इसके अलावा उन्होंने अभिषेक बनर्जी पर उनके साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार करने का आरोप भी लगाया है. उनका कहना है कि इस तरह का व्यवहार वे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं कर सकते.
अभिषेक बनर्जी पर पार्टी को नुकसान पहुंचाने का आरोप
कल्याण बनर्जी ने आरोप लगाया कि अभिषेक बनर्जी के कारण तृणमूल कांग्रेस को नुकसान पहुंचा है, लेकिन इसके बावजूद उनके व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आया है. उन्होंने कहा कि अब वे अभिषेक बनर्जी के साथ न तो काम करना चाहते हैं और न ही उनके साथ राजनीतिक रूप से आगे बढ़ना चाहते हैं.
उनके इस बयान ने पार्टी के भीतर चल रहे मतभेदों को सार्वजनिक कर दिया है और इससे नेतृत्व के सामने नई चुनौती खड़ी होती दिखाई दे रही है.
हाई कोर्ट और सीआईडी से जुड़े मामले ने भी बढ़ाई राजनीतिक चर्चा
इसी बीच अभिषेक बनर्जी ने कथित तौर पर जाली हस्ताक्षर से जुड़े मामले में दर्ज एफआईआर को रद्द कराने के लिए कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख किया है. मामले में पहले से सुनवाई चल रही है. हालांकि, तत्काल सुनवाई की मांग को अदालत ने मंजूरी नहीं दी.
बाद में हाई कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी को शाम 6 बजे तक सीआईडी के सामने पेश होने का निर्देश दिया. साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि अगले दो सप्ताह तक उनके खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी.
तृणमूल कांग्रेस के भीतर बढ़ते मतभेद अब सार्वजनिक रूप ले चुके हैं. वरिष्ठ नेताओं के बीच खुलकर सामने आ रही नाराजगी और लगातार बदलते राजनीतिक घटनाक्रम पार्टी नेतृत्व के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं. आने वाले दिनों में ममता बनर्जी इस संकट से कैसे निपटती हैं, इस पर न केवल पार्टी कार्यकर्ताओं बल्कि पूरे पश्चिम बंगाल की राजनीति की नजर टिकी रहेगी.