Jaspal Rana Death: भारतीय निशानेबाजी जगत के लिए यह बेहद भावुक और दुखद समय है. दिग्गज निशानेबाज और कोच जसपाल राणा के निधन के बाद पूरा खेल जगत शोक में डूबा हुआ है. अपने गुरु को अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए ओलंपियन मनु भाकर देहरादून स्थित उनके आवास पहुंचीं. इस दौरान वह काफी भावुक नजर आईं और नम आंखों से अपने मार्गदर्शक को अंतिम सलाम किया. वहां मौजूद खिलाड़ियों, परिजनों और खेल प्रेमियों का माहौल भी गमगीन दिखाई दिया.
भारतीय शूटिंग को नई पहचान देने वाले दिग्गज थे जसपाल राणा
भारतीय निशानेबाजी के सबसे प्रतिष्ठित चेहरों में शामिल जसपाल राणा ने खिलाड़ी और कोच दोनों भूमिकाओं में देश का नाम रोशन किया. एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले राणा ने अपने शानदार करियर के दौरान कई अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियां हासिल कीं. खेल से संन्यास के बाद उन्होंने कोचिंग के जरिए भारतीय शूटिंग को नई दिशा देने का काम किया.
उनकी देखरेख में कई युवा खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल की. ओलंपियन मनु भाकर की उपलब्धियों के पीछे भी जसपाल राणा के मार्गदर्शन को बेहद अहम माना जाता है.
गुरु और शिष्या के रिश्ते ने एक बार फिर लोगों को भावुक कर दिया
मनु भाकर और जसपाल राणा के बीच का रिश्ता हमेशा चर्चा का विषय रहा. दोनों के बीच कई उतार चढ़ाव भी आए, लेकिन भारतीय शूटिंग के लिए उन्होंने साथ मिलकर कई यादगार उपलब्धियां हासिल कीं. जैसे ही मनु भाकर को अपने गुरु के निधन की जानकारी मिली, वह देहरादून पहुंचीं और उनके पार्थिव शरीर के सामने श्रद्धासुमन अर्पित किए.
मौजूद लोगों का कहना था कि देश ने सिर्फ एक कोच नहीं, बल्कि ऐसे मार्गदर्शक को खोया है, जिन्होंने कई प्रतिभाशाली निशानेबाजों को तराशकर भारतीय खेल जगत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया.
49 साल की उम्र में खेल जगत ने खोया अपना एक बड़ा नाम
जसपाल राणा के निधन की खबर सामने आने के बाद पूरे खेल जगत में शोक की लहर दौड़ गई. खिलाड़ियों, कोचों और विभिन्न खेल संगठनों ने सोशल मीडिया के जरिए उन्हें श्रद्धांजलि दी. प्रशंसकों ने भी उनके योगदान को याद करते हुए भावुक संदेश साझा किए.
भारतीय खेल जगत के लिए हमेशा प्रेरणा बने रहेंगे जसपाल राणा
जसपाल राणा का योगदान भारतीय निशानेबाजी के इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा. एक खिलाड़ी और कोच के रूप में उन्होंने जिस समर्पण और जुनून के साथ देश के लिए काम किया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा. उनका जाना भारतीय खेल जगत के लिए बड़ी क्षति है, लेकिन उनके द्वारा तैयार किए गए खिलाड़ी और उनकी विरासत लंबे समय तक देश को गौरवान्वित करती रहेगी.