Jamtara News : झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस बार मामला स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के विधानसभा क्षेत्र जामताड़ा से सामने आया है, जहां समय पर एंबुलेंस सेवा उपलब्ध नहीं होने के कारण एक मरीज को खटिया पर लादकर ट्रैक्टर से अस्पताल ले जाना पड़ा। अस्पताल पहुंचने में हुई देरी के कारण 43 वर्षीय मोनू टुडू की मौत हो गई। घटना शुक्रवार रात की बताई जा रही है।
जामताड़ा प्रखंड के शहरबेरा गांव निवासी मोनू टुडू की अचानक तबीयत बिगड़ने पर परिजनों ने तत्काल 108 एंबुलेंस सेवा से संपर्क करने का प्रयास किया। परिजनों का आरोप है कि कई बार कॉल करने के बावजूद सहायता नहीं मिली और कॉल तक रिसीव नहीं किया गया। मरीज की हालत लगातार गंभीर होती जा रही थी, जिसके बाद ग्रामीणों ने खटिया पर लादकर ट्रैक्टर से उसे सदर अस्पताल पहुंचाने का प्रयास किया।
ग्रामीणों के अनुसार गांव की सड़कें खराब होने और रात का समय होने के कारण मरीज को अस्पताल पहुंचाने में काफी परेशानी हुई। जब तक मोनू टुडू को सदर अस्पताल लाया गया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अस्पताल में डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
घटना के बाद मृतक के परिवार में मातम पसरा हुआ है। परिजनों का कहना है कि यदि समय पर एंबुलेंस मिल जाती तो शायद उनकी जान बचाई जा सकती थी।
सहिया ने बताई पूरी घटना, पोती ने उठाए स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल
स्थानीय सहिया मीणा मुर्मू ने बताया कि रात करीब 8:40 बजे 108 एंबुलेंस सेवा पर कॉल किया गया था। फोन में घंटी बज रही थी, लेकिन किसी ने कॉल रिसीव नहीं किया। उन्होंने कहा कि मरीज की हालत लगातार बिगड़ रही थी, इसलिए ग्रामीणों की मदद से ट्रैक्टर की व्यवस्था कर अस्पताल ले जाया गया।
मृतक की पोती रूपलता हांसदा ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि स्वास्थ्य मंत्री के अपने जिले में ही लोगों को एंबुलेंस जैसी बुनियादी सुविधा उपलब्ध नहीं हो पा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि एंबुलेंस समय पर मिल जाती तो उनके दादाजी की जान बच सकती थी।
परिवार का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी आज भी लोगों की जान पर भारी पड़ रही है।
सिविल सर्जन ने स्वीकार की एंबुलेंस की कमी
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए सिविल सर्जन डॉ. शिव प्रसाद ने जिले में एंबुलेंस की कमी स्वीकार की है। उन्होंने बताया कि जामताड़ा जिले में कुल 13 एंबुलेंस उपलब्ध हैं, लेकिन इनमें से केवल 5 ही वर्तमान में संचालित हो रही हैं, जबकि 8 एंबुलेंस खराब पड़ी हैं।
उन्होंने कहा कि कई एंबुलेंस छोटी-छोटी तकनीकी खराबियों के कारण बंद हैं, लेकिन संबंधित एजेंसी समय पर उनकी मरम्मत नहीं करा रही है। इस संबंध में विभाग और संबंधित एजेंसी को पत्र भेजा गया है तथा जल्द समाधान का प्रयास किया जा रहा है।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल, ग्रामीणों में आक्रोश, सुधार की मांग
इस घटना के बाद जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि जब स्वास्थ्य मंत्री के क्षेत्र में ही एंबुलेंस सेवा समय पर उपलब्ध नहीं हो पा रही है, तो दूरदराज के अन्य इलाकों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
घटना ने 108 एंबुलेंस सेवा की कार्यप्रणाली, ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचे और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या व्यवस्था की जाती है।
मोनू टुडू की मौत के बाद स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने स्वास्थ्य व्यवस्था में तत्काल सुधार की मांग की है। लोगों का कहना है कि खराब एंबुलेंसों की मरम्मत, पर्याप्त वाहनों की उपलब्धता और आपातकालीन सेवाओं की जवाबदेही सुनिश्चित किए बिना ऐसी घटनाओं पर रोक लगाना संभव नहीं होगा।