Jamshedpur: एनआईटी जमशेदपुर के तीन विद्यार्थियों ने अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से संस्थान का नाम रोशन किया है। इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग के लंका श्री लक्ष्मी प्रसन्ना कुमार तथा मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग की तनिषा श्रीवास्तव और प्रियांशु कुमार का चयन देश की प्रमुख रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी में हुआ है। तीनों को सालाना 13 लाख रुपये के आकर्षक पैकेज पर नियुक्ति मिली है। चयनित विद्यार्थियों को रक्षा क्षेत्र की एक अत्यंत महत्वपूर्ण तकनीकी भूमिका सौंपी गई है। वे मिसाइल सिस्टम में उपयोग होने वाली उन्नत लक्ष्य पहचान तकनीक के विकास से जुड़े कार्यों में योगदान देंगे। यह तकनीक मिसाइल को लक्ष्य का पता लगाने, उसकी गतिविधियों पर नजर रखने और सटीक प्रहार सुनिश्चित करने में मदद करती है।
देश की रक्षा क्षमता बढ़ाने में निभाएंगे भूमिका
विशेषज्ञों के अनुसार इस क्षेत्र में काम करना किसी भी युवा इंजीनियर के लिए बड़ी उपलब्धि माना जाता है। चयनित छात्र उन परियोजनाओं का हिस्सा बनेंगे जो देश की सामरिक ताकत को मजबूत करने और रक्षा तकनीक को अधिक आधुनिक बनाने में सहायक हैं। एनआईटी जमशेदपुर प्रशासन ने छात्रों की सफलता पर खुशी व्यक्त की है। संस्थान के निदेशक प्रो. गौतम सूत्रधार ने कहा कि यह उपलब्धि विद्यार्थियों की मेहनत, तकनीकी कौशल और संस्थान में मिल रही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का परिणाम है। उन्होंने विश्वास जताया कि ये युवा इंजीनियर भविष्य में देश के रक्षा अनुसंधान और तकनीकी विकास में अहम योगदान देंगे।
क्या है सीकर तकनीक, जिसे मिसाइल की ‘आंख’ कहा जाता है?
आधुनिक मिसाइल प्रणालियों में लक्ष्य को पहचानने और उसका पीछा करने का काम एक विशेष तकनीक करती है, जिसे सीकर कहा जाता है। यह प्रणाली मिसाइल को सही दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करती है और लक्ष्य तक सटीक पहुंचने में मदद करती है। इसमें रडार, इन्फ्रारेड, लेजर और अन्य उन्नत सेंसरों का उपयोग किया जाता है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी तकनीकों का स्वदेशी विकास भारत की रणनीतिक मजबूती के लिए बेहद जरूरी है। इससे न केवल आधुनिक मिसाइलों की क्षमता बढ़ती है, बल्कि विदेशी तकनीक पर निर्भरता भी कम होती है। वर्तमान में भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के उद्देश्य से कई उन्नत तकनीकी परियोजनाओं पर तेजी से काम कर रहा है।