Jamshedpur News: पूर्वी सिंहभूम जिले के औद्योगिक विकास को नई रफ्तार मिलने वाली है. मुसाबनी प्रखंड के रूआम गांव में करीब 156 करोड़ रुपये की लागत से ग्रीनफील्ड एथेनॉल प्लांट स्थापित किया जाएगा. प्लांट के शुरू होने के बाद क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और करीब 200 लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से काम मिलने की उम्मीद है.
इस परियोजना को हरियाणा की कंपनी किज्लक स्टार्क एग्रो प्राइवेट लिमिटेड स्थापित करेगी. इसके लिए राज्य सरकार की ओर से कंपनी को 25 एकड़ जमीन आवंटित की जा चुकी है. प्लांट में प्रतिदिन 100 किलोलीटर एथेनॉल उत्पादन की क्षमता विकसित की जाएगी.
प्लांट में बिजली का भी होगा उत्पादन
एथेनॉल उत्पादन के साथ ही यहां को-जनरेशन प्लांट भी लगाया जाएगा. इसके जरिए करीब 2.8 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है. संभावना जताई जा रही है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 से प्लांट में व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो सकता है.
जिले में पहले से संचालित है एथेनॉल प्लांट
पूर्वी सिंहभूम में यह दूसरा बड़ा एथेनॉल प्लांट होगा. इससे पहले बहरागोड़ा प्रखंड के ओल्डा गांव में मार्च 2023 से एक एथेनॉल प्लांट संचालित है. ग्लोबल स्पिरिट्स लिमिटेड द्वारा संचालित इस प्लांट की उत्पादन क्षमता अब बढ़कर 220 किलोलीटर प्रतिदिन हो चुकी है. यहां करीब 5 मेगावाट बिजली उत्पादन भी किया जा रहा है.
किसानों को मिलेगा बाजार, अनाज से बनेगा एथेनॉल
मुसाबनी में बनने वाले प्लांट की खास बात यह होगी कि इसमें अनाज से एथेनॉल तैयार किया जाएगा. इसके लिए स्थानीय किसानों से टूटे हुए चावल, मक्का, गेहूं और बाजरा की खरीद की जाएगी. इससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर बाजार मिलने की उम्मीद है.
तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार एक क्विंटल चावल से करीब 45 लीटर एथेनॉल तैयार किया जा सकता है. वहीं प्लांट से निकलने वाले ठोस अपशिष्ट का इस्तेमाल पशु चारे के रूप में किया जाएगा, जिससे पर्यावरण पर भी कम असर पड़ेगा.
पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को मिलेगा बढ़ावा
एथेनॉल का इस्तेमाल पेट्रोल में मिलावट के लिए भी किया जाता है. भारत सरकार पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक एथेनॉल मिश्रण (E-20) को बढ़ावा दे रही है, जिससे प्रदूषण कम करने और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने का लक्ष्य है. इसके अलावा एथेनॉल का उपयोग पेंट, वार्निश, स्याही, गोंद और प्लास्टिक उद्योगों में भी बड़े पैमाने पर होता है.