Mobile Addiction In Kids: आज के दौर में बच्चों के हाथ में मोबाइल फोन आम बात बन गई है. कई बार माता पिता बच्चों को शांत रखने, खाना खिलाने या उनका ध्यान दूसरी तरफ लगाने के लिए फोन दे देते हैं. हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदत लंबे समय में बच्चों के मानसिक, शारीरिक और सामाजिक विकास पर गंभीर असर डाल सकती है. कई शोधों में भी सामने आया है कि कम उम्र में जरूरत से ज्यादा स्क्रीन के संपर्क में आने से बच्चों का दिमाग पूरी तरह विकसित नहीं हो पाता और वर्चुअल ऑटिज्म जैसी समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है.
मोबाइल की लत से ध्यान, व्यवहार और पढ़ाई पर पड़ रहा असर
लगातार स्क्रीन देखने से बच्चों की एकाग्रता प्रभावित होने लगती है. मोबाइल में बदलते वीडियो, तेज आवाज और रंगीन ग्राफिक्स बच्चों के दिमाग को लगातार उत्तेजित करते हैं, जिससे उनमें बार बार नया कंटेंट देखने की आदत बढ़ती जाती है. इसका असर उनकी पढ़ाई और सामान्य गतिविधियों पर भी दिखाई देता है. डॉक्टरों के मुताबिक ज्यादा स्क्रीन टाइम वाले बच्चों में ध्यान भटकना, पढ़ाई में रुचि कम होना और काम अधूरा छोड़ने जैसी समस्याएं ज्यादा देखने को मिलती हैं. कई बार मोबाइल सीमित करने या छीनने पर बच्चों में गुस्सा, चिड़चिड़ापन और आक्रामक व्यवहार भी देखने को मिलता है. इसके अलावा आंखों से जुड़ी परेशानी, नींद की कमी और फोकस कमजोर होने की समस्या भी बढ़ सकती है. विशेषज्ञ 13 साल से कम उम्र के बच्चों के हाथ में मोबाइल देने को लेकर सावधानी बरतने की सलाह देते हैं.
कम उम्र में ज्यादा स्क्रीन टाइम से बोलने और सामाजिक विकास पर भी असर
विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे बच्चों में ज्यादा मोबाइल इस्तेमाल की वजह से बोलने में देरी की समस्या पैदा हो सकती है. बच्चे जब परिवार और आसपास के लोगों से बातचीत करते हैं, तभी वे भाषा और सामाजिक व्यवहार सीखते हैं. लेकिन अगर उनका अधिक समय वीडियो देखने में बीतता है तो यह प्रक्रिया धीमी पड़ सकती है. ऐसे बच्चे शब्दों की नकल तो कर लेते हैं, लेकिन भावनाओं और सामाजिक व्यवहार को समझने में दिक्कत महसूस कर सकते हैं. डॉक्टर सलाह देते हैं कि दो साल से कम उम्र के बच्चों को स्क्रीन से जितना संभव हो दूर रखा जाए और बड़े बच्चों के स्क्रीन टाइम पर भी नियंत्रण रखा जाए.
बच्चों को मोबाइल से दूर रखने के लिए माता पिता को भी बदलनी होंगी आदतें
विशेषज्ञों के अनुसार मोबाइल को अचानक पूरी तरह बंद करना समाधान नहीं है, बल्कि संतुलित और नियंत्रित इस्तेमाल ज्यादा जरूरी है. माता पिता को बच्चों के स्क्रीन टाइम पर नजर रखने के साथ यह भी देखना चाहिए कि वे किस तरह का कंटेंट देख रहे हैं. परिवार के साथ खाना खाते समय और सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल और स्क्रीन से दूरी बनानी चाहिए. बच्चों को आउटडोर गेम्स, साइकिलिंग, योग और अन्य शारीरिक गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए. साथ ही माता पिता को खुद भी मोबाइल के इस्तेमाल में संयम दिखाना होगा, क्योंकि बच्चे सबसे ज्यादा सीख अपने घर और परिवार से ही लेते हैं.
बढ़ता स्क्रीन टाइम बच्चों के मानसिक, शारीरिक और सामाजिक विकास के लिए चुनौती बनता जा रहा है. ऐसे में समय रहते सही आदतें विकसित करना और बच्चों को वास्तविक गतिविधियों से जोड़ना बेहद जरूरी है. विशेषज्ञों का मानना है कि संतुलित तकनीक उपयोग और परिवार की सक्रिय भूमिका ही बच्चों को मोबाइल की लत से बचाने का सबसे प्रभावी तरीका है.