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  • 2026-06-17

Main Vaapas Aaunga Review: बंटवारे के जख्म, अधूरी मोहब्बत और यादों के सहारे चलती एक रूहानी कहानी

Main Vaapas Aaunga Review: कुछ कहानियां सिर्फ प्यार की नहीं होतीं, वे वक्त, यादों और अधूरे वादों की भी होती हैं. इम्तियाज अली की नई फिल्म मैं वापस आऊंगा भी ऐसी ही एक कहानी है, जो दो पीढ़ियों को जोड़ते हुए दर्शकों को भारत-पाकिस्तान विभाजन के दर्द और एक अधूरी मोहब्बत की दुनिया में ले जाती है.
कहानी की शुरुआत 95 वर्षीय ईश्वर सिंह ग्रेवाल से होती है, जो पाकिस्तान जाने की कोशिश के दौरान मेडिकल स्ट्रोक का शिकार हो जाते हैं. डिमेंशिया से जूझ रहे ईश्वर सिंह की टूटी बिखरी यादों के पीछे आखिर कौन सा राज छिपा है, यही जानने के लिए उनका पोता निरवैर पाकिस्तान के सरगोधा पहुंचता है.

धीरे-धीरे उसके सामने एक ऐसी प्रेम कहानी खुलती है, जो बंटवारे की त्रासदी में कहीं पीछे छूट गई थी. ईश्वर सिंह अपनी जिंदगी के आखिरी पड़ाव में अपनी पहली मोहब्बत अफसाना से एक बार फिर मिलना चाहते हैं. यही अधूरा सपना फिल्म की भावनात्मक धुरी बन जाता है.

जब प्यार के बीच नहीं आई नफरत की दीवार
लेखक नयनिका मेहतानी और इम्तियाज अली ने इस संवेदनशील विषय को किसी राजनीतिक बहस या धार्मिक कटुता से दूर रखते हुए सिर्फ इंसानी रिश्तों और भावनाओं के नजरिए से पेश किया है. यही वजह है कि फिल्म कई जगहों पर बेहद निजी और दिल के करीब महसूस होती है.

फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष इसके कलाकार हैं. 95 वर्षीय ईश्वर सिंह के किरदार में नसीरुद्दीन शाह ने अपने अभिनय से गहरी छाप छोड़ी है. उन्होंने बिखरती यादों, अकेलेपन और एक अधूरी चाहत को बेहद सादगी के साथ पर्दे पर उतारा है.

युवा ईश्वर के रूप में वेदांग रैना और अफसाना के किरदार में शरवरी वाघ की केमिस्ट्री कहानी में मासूमियत और ताजगी लेकर आती है. वहीं पोते निरवैर के किरदार में दिलजीत दोसांझ ने एक बार फिर अपनी सहज अदाकारी से दर्शकों का ध्यान खींचा है.

रहमान का संगीत कहानी की भावनाओं को देता है नई ऊंचाई
इम्तियाज अली की फिल्मों की तरह इस बार भी संगीत कहानी का अहम हिस्सा बनकर सामने आता है. ए आर रहमान का बैकग्राउंड स्कोर कई दृश्यों को और ज्यादा असरदार बना देता है. फिल्म के गाने कहानी के साथ स्वाभाविक रूप से आगे बढ़ते हैं और कहीं भी जबरदस्ती जोड़े गए नहीं लगते.

फिल्म के अंत में दिलजीत दोसांझ की आवाज में सुनाई देने वाला गाना क्या कमाल है लंबे समय तक याद रह जाता है. यह गीत फिल्म के भावनात्मक असर को और गहरा कर देता है और दर्शकों के साथ थिएटर से बाहर तक चलता है.

धीमी शुरुआत के बाद बॉक्स ऑफिस पर संभली फिल्म
करीब 70 करोड़ रुपये की लागत से बनी इस फिल्म ने पहले दिन 1.38 करोड़ रुपये की नेट कमाई के साथ धीमी शुरुआत की थी. लगभग 166 मिनट लंबी यह फिल्म तेज रफ्तार मनोरंजन के बजाय ठहराव और भावनाओं पर भरोसा करती है, जिसकी वजह से शुरुआत में इसका असर सीमित रहा.

हालांकि दर्शकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया और माउथ पब्लिसिटी का फायदा फिल्म को बाद के दिनों में मिला. पांचवें दिन इसकी कमाई 1.65 करोड़ से 1.90 करोड़ रुपये के बीच रही, जो पहले दिन से बेहतर रही.

पांच दिनों में फिल्म का नेट कलेक्शन 8.30 करोड़ से 8.38 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि ग्रॉस कलेक्शन 9.88 करोड़ से 9.98 करोड़ रुपये के बीच रहा. विदेशों में भी फिल्म को अच्छा रिस्पॉन्स मिला और ओवरसीज मार्केट से 6.20 करोड़ रुपये की कमाई हुई. इसके साथ ही फिल्म का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन 16.18 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है.

क्या “मैं वापस आऊंगा” हर दर्शक के लिए है
कुछ समीक्षकों ने स्क्रिप्ट के स्तर पर इसे इम्तियाज अली की कमजोर फिल्मों में शामिल किया है. फिल्म की धीमी रफ्तार हर दर्शक को पसंद आए, यह जरूरी नहीं है. लेकिन अगर आप सिनेमा में शोर और थ्रिल से ज्यादा भावनाएं, रिश्ते और यादों की गहराई तलाशते हैं, तो मै वापस आऊंगा आपको निराश नहीं करेगी.

यह सिर्फ एक प्रेम कहानी नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए एक भावनात्मक सफर है, जो मानते हैं कि कुछ रिश्ते वक्त से हारते नहीं हैं. वे बस किसी अधूरे वादे के पूरा होने का इंतजार करते रहते हैं.
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