News26 Exclucive: बरसों का इंतजार, दफ्तरों के चक्कर और लंबा संघर्ष! आखिरकार जमशेदपुर के बिरसानगर में बने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के फ्लैटों की चाबी कल यानी शुक्रवार, 19 जून को लाभुकों को सौंप दी जाएगी, लेकिन इस बहुप्रतीक्षित "गृह प्रवेश" की खुशी के पीछे एक कड़वी हकीकत और कई अनसुलझे सवाल भी खड़े हैं। सवाल यह है कि क्या घरो की चाबियां मिलने के बाद लाभुकों को वाकई अपने सपनों का आशियाना मिल पाएगा, या फिर उन्हें बुनियादी सहूलियतों के लिए एक नए आंदोलन की शुरुआत करनी पड़ेगी?
उद्घाटन कल और लीपापोती आज
कल जहां सैकड़ों परिवारों के चेहरे पर मुस्कान लाने की तैयारी चल रही थी, वहीं आज उन फ्लैटों के भीतर और बाहर हड़बड़ाहट में लीपापोती का खेल चल रहा था। न्यूज़26 की टीम आज मौके पर गई और देखा की भवनों की अंदरूनी स्थिति ठीक नहीं है. कई फ्लैटों की दीवारों में अभी से ही बड़ी-बड़ी दरारें आ चुकी हैं। आज ही उन दरारों को सीमेंट और पुट्टी से आनन-फानन में छिपाने की कोशिश की जा रही थी। घरों के नल और प्लंबिंग का काम खराब स्तर का है। एक और अजीबोगरीब स्थिति यह देखने को मिली कि कहीं एक घर की बेल (घंटी) बज रही है, तो बगल के चार घरों की बेलें पूरी तरह ठप हैं। मुख्य सड़क से पीएम आवास परिसर तक आने-जाने के लिए जो सड़क बनाई गई है, वह महज गिट्टी डालकर छोड़ दी गई है। इस अस्थायी सड़क के कारण अभी तो धूल का गुबार उड़ेगा ही, लेकिन मानसून की दस्तक के साथ ही यहां जलजमाव और कीचड़ इतना फैलेगा कि लोगों का पैदल चलना भी दूभर हो जाएगा। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जो लाभुक कार्यालयों के चक्कर काट-काट कर, अपनी गाढ़ी कमाई के साढ़े चार लाख रुपये जमा करने के बाद इस उम्मीद में आ रहे हैं कि उन्हें पक्का मकान मिलेगा, क्या वे इन दरारें वाली दीवारों के बीच रहने को मजबूर होंगे?
फैक्ट्स और ग्राउंड रियलिटी, क्या कहती है बिरसानगर योजना की टाइमलाइन?
इस योजना का इतिहास और प्रशासनिक लापरवाही के आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि योजना को जमीन पर उतारने में कितनी सुस्ती बरती गई. बिरसानगर वर्टिकल (G+8) मॉडल पर आधारित इस महत्वाकांक्षी लाइट हाउस प्रोजेक्ट का शिलान्यास नवंबर 2018 में ही किया गया था। इस पूरी परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 282 करोड़ रुपये तय की गई थी, जिसके तहत 32 ब्लॉक में कुल 9,592 आवास बनाए जाने का लक्ष्य था। इसका निर्माण कार्य साल 2019 और उसके बाद शुरू हुआ। नियमों के मुताबिक, लाभुकों को ये फ्लैट कम से कम 3 साल पहले (यानी 2022-23 तक) मिल जाने चाहिए थे, लेकिन प्रशासनिक लेती-देती और तकनीकी खामियों की वजह से आज 2026 में जाकर इसके पहले चरण के कुछ ब्लॉक की चाबी दी जा रही है। कुल प्रस्तावित 32 ब्लॉकों में से फिलहाल केवल कुछ ही ब्लॉक (मुख्य रूप से 2-3 ब्लॉक) पूरी तरह से तैयार बताए जा रहे हैं, जबकि बाकी का काम अभी भी अधर में लटका हुआ है।
160 मकानों को तोड़ने का वो दर्दनाक सच
इस आवासीय परिसर की बुनियाद में जमशेदपुर के ही 160 गरीब परिवारों के आशियाने टूटने की एक दर्दभरी कहानी भी दफन है। साल 2018 में जब इस योजना की रूपरेखा तैयार की गई, तब बिना किसी ठोस सर्वे के अंधाधुंध तरीके से वहां पहले से रह रहे 160 मकानों को आंशिक रूप से ध्वस्त कर दिया गया। नागरिकों के बसे-बसाए घरों को उजाड़कर इस सरकारी योजना की नींव रखी गई थी। यह योजना शुरुआत से ही विवादों और तकनीकी खामियों से घिरी रही। 2018 में अफरा-तफरी में इसका शिलान्यास तो कर दिया गया, लेकिन यह नहीं देखा गया कि जिस जमीन पर यह ब्लॉक बनने हैं, उसके एक छोर से दूसरे छोर के बीच करीब 30 फीट की ऊंचाई का अंतर (स्लोप) है। अगर इसे वैज्ञानिक तरीके से समतल किया जाता, तो यह एक खूबसूरत परिसर बनता।
आगे क्या?
सरकार को यह समझना होगा कि प्रधानमंत्री आवास योजना का मकसद सिर्फ कागजों पर आंकड़े दुरुस्त करना या चाबियां बांटकर वाहवाही लूटना नहीं है। साढ़े चार लाख रुपये देने के बाद भी अगर गरीब परिवार को दरारें वाली दीवारें, बिना पानी-निकासी के फ्लैट और धूल भरी अस्थायी सड़कें मिलें, तो यह उनके हक के साथ खिलवाड़ है।