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  • 2026-06-27

Jharkhand Education News: झारखंड में शिक्षा का नया मॉडल, 2026-30 सत्र से जमशेदपुर के सिर्फ तीन सरकारी कॉलेजों में होगी पढ़ाई

 Jharkhand Education News: झारखंड के सरकारी कॉलेजों में विज्ञान संकाय की पढ़ाई को लेकर राज्य सरकार ने नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है. शैक्षणिक सत्र 2026-30 से राज्य के बड़े शहरों में साइंस की पढ़ाई केवल चयनित सरकारी कॉलेजों में ही संचालित होगी. इसका उद्देश्य उपलब्ध प्रयोगशालाओं, शिक्षकों और अन्य संसाधनों का बेहतर उपयोग कर शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाना है.

जमशेदपुर में तीन कॉलेजों तक सिमटी साइंस की पढ़ाई
नई व्यवस्था के तहत जमशेदपुर में अब बीएससी की पढ़ाई केवल जमशेदपुर को-ऑपरेटिव कॉलेज, जमशेदपुर वर्कर्स कॉलेज और ग्रेजुएट कॉलेज में होगी. इन तीनों कॉलेजों में कुल 1,620 सीटों पर चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम (FYUGP) के तहत नामांकन लिया जाएगा. पहले शहर के कई सरकारी कॉलेजों में विज्ञान संकाय संचालित होता था, लेकिन अब नए नामांकन सिर्फ इन तीन संस्थानों में होंगे.

रांची और धनबाद में भी लागू होगा नया मॉडल
सिर्फ जमशेदपुर ही नहीं, बल्कि रांची और धनबाद में भी विज्ञान संकाय की पढ़ाई चुनिंदा सरकारी कॉलेजों में केंद्रित की जाएगी. बताया जा रहा है कि रांची यूनिवर्सिटी में मात्र तीन कॉलेजों में ही साइंस की पढ़ाई होगी, इसमें डोरंडा कॉलेज, मारवाड़ी कॉलेज और रांची विमेंस कॉलेज शामिल है. इन शहरों में भी संसाधनों का बिखराव रोकने और बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सीमित कॉलेजों में ही विज्ञान विषयों का संचालन किया जाएगा. विभाग का मानना है कि इससे शिक्षकों की उपलब्धता, प्रयोगशालाओं का उपयोग और अकादमिक गुणवत्ता में सुधार होगा.

बेहतर लैब और विशेषज्ञ शिक्षकों का मिलेगा लाभ
उच्च शिक्षा विभाग का कहना है कि नई व्यवस्था लागू होने से छात्रों को आधुनिक प्रयोगशालाओं, बेहतर उपकरणों और विषय विशेषज्ञ शिक्षकों का लाभ मिलेगा. संसाधनों को एक जगह केंद्रित करने से कॉलेजों के आधारभूत ढांचे को भी और मजबूत किया जा सकेगा.



विकल्प घटेंगे, प्रतिस्पर्धा बढ़ने की संभावना
नई व्यवस्था का दूसरा पहलू यह भी है कि छात्रों के पास पसंद के सरकारी कॉलेज चुनने के विकल्प पहले की तुलना में कम हो जाएंगे. ऐसे में चयनित कॉलेजों में प्रवेश के दौरान प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है और छात्र संख्या का दबाव भी अधिक रहेगा. हालांकि सरकार का दावा है कि यह बदलाव विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण विज्ञान शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा.
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