Jharkhand News: तमिलनाडु की एक फैक्ट्री में हाल ही में हुए अमोनिया गैस रिसाव के बाद झारखंड के प्रवासी मजदूरों की स्थिति को लेकर गंभीर चिंता सामने आई है. हादसे के बाद बचे 39 झारखंडी मजदूर पिछले एक सप्ताह से एक छोटे से हॉल में रहने को मजबूर हैं और अब तक अपने घर लौटने का इंतजार कर रहे हैं. इस मामले ने एक बार फिर दूसरे राज्यों में काम करने वाले झारखंड के श्रमिकों की सुरक्षा और व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
सोशल मीडिया के जरिए सामने आया मामला
इस पूरे घटनाक्रम को झारखंड जनाधिकार महासभा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर साझा किया. महासभा का आरोप है कि गैस रिसाव की घटना के बाद इन 39 मजदूरों को सुरक्षित स्थान पर तो रखा गया, लेकिन वे पिछले एक सप्ताह से बेहद सीमित संसाधनों के बीच उसी हॉल में रह रहे हैं.
महासभा ने यह भी दावा किया कि अब तक राज्य प्रशासन की ओर से इन मजदूरों से कोई सीधा संपर्क नहीं किया गया था, जिससे उनकी चिंता और बढ़ गई.
मुख्यमंत्री ने लिया तत्काल संज्ञान
मामला सार्वजनिक होने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने तत्काल संज्ञान लिया. उन्होंने झारखंड माइग्रेंट कंट्रोल रूम को निर्देश दिया कि पूरे मामले की तुरंत जानकारी लेकर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए.
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा है कि तमिलनाडु में फंसे सभी 39 झारखंडी श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और उन्हें सकुशल वापस लाने के लिए हरसंभव कदम उठाए जाएं.
प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा फिर बनी चिंता का विषय
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि दूसरे राज्यों में कार्यरत झारखंड के प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा और आपात स्थिति में उनके लिए त्वरित सहायता व्यवस्था कितनी प्रभावी है. फिलहाल राज्य सरकार ने संबंधित एजेंसियों को सक्रिय करते हुए मजदूरों की स्थिति पर नजर रखने और उनकी सुरक्षित वापसी की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए हैं.