Japan Earthquake: जापान के उत्तरी इवाते प्रांत में रविवार सुबह 6.1 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप दर्ज किया गया. पिछले चार दिनों के भीतर यह तीसरा बड़ा भूकंप है, जिससे लोगों में दहशत का माहौल बना हुआ है. फिलहाल किसी बड़े नुकसान या सुनामी की चेतावनी जारी नहीं की गई है, लेकिन प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है.
इवाते में तड़के महसूस हुए तेज झटके
जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) के मुताबिक, रविवार सुबह स्थानीय समयानुसार करीब 5:21 बजे इवाते प्रांत के तटीय क्षेत्र में भूकंप आया. इसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 6.1 मापी गई, जबकि भूकंप का केंद्र जमीन से लगभग 40 किलोमीटर नीचे था. झटके इतने तेज थे कि आमोरी प्रांत के हाचिनोहे शहर तक इन्हें स्पष्ट रूप से महसूस किया गया.
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इस भूकंप में किसी के हताहत होने या बड़े पैमाने पर संपत्ति के नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है. साथ ही सुनामी का कोई अलर्ट भी जारी नहीं किया गया है.
लगातार भूकंपों से बढ़ी चिंता
पिछले 96 घंटों के दौरान जापान में लगातार आ रहे भूकंपों ने प्रशासन और वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है. 25 जून को इवाते प्रांत में 7.2 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया था. इसके अगले दिन 26 जून की रात टोक्यो और माउंट फूजी के पास स्थित यामानाशी प्रांत में 5.6 तीव्रता के झटके महसूस किए गए. रविवार को फिर इवाते प्रांत में 6.1 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया.
शुक्रवार रात आए भूकंप में यामानाशी और कनागावा प्रांत में कम से कम छह लोग घायल हुए थे. कनागावा के नाकाई शहर में भूस्खलन हुआ था, जबकि फुजियोशिदा में कंक्रीट की दीवारें गिर गई थीं. करीब 2860 घरों की बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई थी और बुलेट ट्रेन समेत कई रेल सेवाओं का संचालन घंटों तक बाधित रहा था.
आफ्टरशॉक और खराब मौसम का खतरा बरकरार
जापान मौसम विभाग के प्रमुख अयाताका एबिता ने बताया है कि अगले दो से तीन दिनों के भीतर एक और बड़े भूकंप आने की 10 से 20 प्रतिशत संभावना बनी हुई है. इसके अलावा जापान के मुख्य द्वीप होंशू की ओर बढ़ रहे दो ट्रॉपिकल तूफानों के कारण भारी बारिश और भूस्खलन का खतरा भी बढ़ सकता है, खासकर उन इलाकों में जो हालिया भूकंपों से प्रभावित हुए हैं.
स्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने प्रधानमंत्री कार्यालय में क्राइसिस मैनेजमेंट सेंटर स्थापित किया है. उन्होंने कहा कि सरकार की पहली प्राथमिकता लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है. प्रशासन ने नागरिकों से क्षतिग्रस्त इमारतों, पहाड़ी क्षेत्रों और संवेदनशील सड़कों से दूर रहने की अपील की है, क्योंकि आफ्टरशॉक आने की संभावना अभी भी बनी हुई है.