Ranchi News : हूल दिवस के अवसर पर झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार और झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने अलग-अलग कार्यक्रमों में संथाल हूल के महानायक सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानो को श्रद्धांजलि अर्पित की। दोनों कार्यक्रमों में शहीदों के बलिदान को याद करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया गया।
राज्यपाल बोले- हूल क्रांति स्वतंत्रता संग्राम का गौरवशाली अध्याय
रांची स्थित लोक भवन में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने सिदो-कान्हू के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि हूल क्रांति भारत के स्वतंत्रता संग्राम का एक गौरवशाली अध्याय है। सिदो-कान्हू, चांद-भैरव, फूलो-झानो और हूल आंदोलन के सभी वीर सेनानियों ने अंग्रेजी शासन, अन्याय और शोषण के खिलाफ अदम्य साहस के साथ संघर्ष किया।
राज्यपाल ने कहा कि इन वीरों का त्याग, बलिदान और राष्ट्र के प्रति समर्पण आज भी लोगों को प्रेरित करता है। उन्होंने लोगों से शहीदों के आदर्शों को अपनाने तथा समाज में न्याय, समानता और एकता के लिए मिलकर कार्य करने की अपील की।
कांग्रेस ने आदिवासी अधिकारों और सामाजिक न्याय की रक्षा का लिया संकल्प

हूल दिवस पर झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने कांग्रेस भवन और मोराबादी स्थित सिदो-कान्हू पार्क में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश के नेतृत्व में नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानो की प्रतिमा एवं चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया।
केशव महतो कमलेश ने कहा कि 30 जून 1855 को भोगनाडीह से शुरू हुआ संथाल हूल केवल एक विद्रोह नहीं, बल्कि देश की आजादी की लड़ाई का पहला बड़ा संगठित जनआंदोलन था। उन्होंने कहा कि हजारों आदिवासी वीरों ने जल, जंगल, जमीन, स्वाभिमान और मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।
उन्होंने कहा कि हूल दिवस शहीदों को याद करने के साथ-साथ अन्याय, शोषण और दमन के खिलाफ संघर्ष का संकल्प लेने का भी दिन है। कांग्रेस सामाजिक न्याय, आदिवासी अधिकारों और संविधान की रक्षा के लिए लगातार संघर्ष करती रहेगी।
कार्यक्रम में उपस्थित नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अमर शहीदों के बताए मार्ग पर चलने तथा जल, जंगल, जमीन, सामाजिक न्याय और संविधान की रक्षा के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प दोहराया।