Commercial Fuel Sales: 1 जुलाई 2026 से देश के कमर्शियल ग्राहकों के लिए पेट्रोल और डीजल खरीद के नियम बदल गए हैं. केंद्र सरकार ने व्यावसायिक खरीदारों पर लगी मात्रा सीमा समाप्त कर दी है. अब ट्रांसपोर्ट कंपनियां, फैक्ट्रियां और अन्य औद्योगिक संस्थान रिटेल पेट्रोल पंपों से अपनी जरूरत के अनुसार बिना किसी सीमा के ईंधन खरीद सकेंगे. यह फैसला पश्चिम एशिया में हालात सामान्य होने और फ्यूल सप्लाई में सुधार के बाद लिया गया है.
आखिर क्यों लगाई गई थी ईंधन खरीद पर रोक
जून 2026 में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और युद्ध के कारण कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई थी. ऐसे में देश में पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता बनाए रखने के लिए सरकार ने कमर्शियल ग्राहकों की बड़ी मात्रा में ईंधन खरीद पर अस्थायी रोक लगा दी थी. इसका उद्देश्य आम उपभोक्ताओं को किसी तरह की कमी का सामना न करना पड़े और जमाखोरी पर भी रोक लगाई जा सके.
डीजल की कीमतों के अंतर से बढ़ा दबाव, सरकारी पंपों पर बढ़ी मांग
प्रतिबंध के दौरान औद्योगिक ग्राहकों के लिए मिलने वाला डीजल खुदरा कीमत से करीब 40 रुपये प्रति लीटर महंगा था. यही वजह रही कि कई कंपनियां औद्योगिक ईंधन की बजाय रिटेल पेट्रोल पंपों से डीजल खरीदने लगीं. इससे इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के एक लाख से ज्यादा पेट्रोल पंपों पर ईंधन की मांग तेजी से बढ़ी, जबकि बाजार आधारित कीमतों पर ईंधन बेचने वाली निजी कंपनियों के पंपों पर बिक्री अपेक्षाकृत कम रही.
प्रतिबंध हटने से ट्रांसपोर्ट और उद्योग जगत को मिलेगा सीधा फायदा
सरकार के नए फैसले से अब कमर्शियल ग्राहकों को ईंधन खरीदने में किसी तरह की मात्रा सीमा का सामना नहीं करना पड़ेगा. इससे ट्रांसपोर्ट सेक्टर, उद्योगों और बड़े व्यावसायिक संस्थानों को संचालन में आसानी होगी. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है, इसलिए वैश्विक हालात का असर घरेलू बाजार पर पड़ता है. अब ऊर्जा आपूर्ति स्थिर होने के बाद सरकार ने पाबंदी हटाकर फ्यूल वितरण व्यवस्था को सामान्य कर दिया है. इससे कारोबार सुचारु रहेगा और देशभर में ईंधन की उपलब्धता भी बेहतर बनी रहने की उम्मीद है.