Jamshedpur: तूरामडीह विस्थापित समिति, जमशेदपुर की एक आवश्यक बैठक तूरामडीह–लंदुप ग्राम सामुदायिक भवन में संयोजक रामसाईं सोरेन की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में भाजपा नेता एवं आदिवासी सुरक्षा परिषद, जमशेदपुर (झारखंड) के अध्यक्ष राम सिंह मुंडा उपस्थित रहे। बैठक को संबोधित करते हुए राम सिंह मुंडा ने कहा कि क्षेत्र के विस्थापित एवं प्रभावित परिवारों की समस्याओं को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा द्वारा किए गए लोकतांत्रिक हस्तक्षेप एवं धरना कार्यक्रम को लेकर झामुमो विधायक संजीव सरदार के इशारे पर दिए जा रहे कुछ राजनीतिक बयानों पर आदिवासी सुरक्षा परिषद घोर आपत्ति व्यक्त करती है। उन्होंने कहा कि जनहित के मुद्दों को राजनीतिक रंग देने का प्रयास किया जा रहा है।
ग्रामसभा और पेसा कानून पर टिप्पणी
उन्होंने आरोप लगाया कि ग्रामसभा और पेसा कानून का भय दिखाकर स्थानीय ग्रामीणों को गुमराह किया जा रहा है तथा निजी स्वार्थ साधने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही परंपरागत माझी परगना को मातृ संगठन के रूप में इस्तेमाल करने का भी आरोप लगाया गया। राम सिंह मुंडा ने बताया कि इससे पूर्व डॉ मीरा मुंडा ने UCIL के संबंधित अधिकारियों से मुलाकात कर विस्थापित परिवारों की समस्याएं उठाई थीं। इस दौरान भाजपा जिला अध्यक्ष संजीव सिन्हा भी मौजूद रहे और उन्होंने प्रभावित परिवारों की समस्याओं को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने में सहयोग किया।
विस्थापितों की प्रमुख मांगें
विस्थापितों द्वारा सौंपे गए मांग पत्र में रोजगार में प्राथमिकता, समुचित पुनर्वास, आश्रितों को रोजगार, धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों का संरक्षण एवं पुनर्निर्माण, सड़क, बिजली एवं पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं, बच्चों की शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, प्रदूषण नियंत्रण तथा स्थानीय हितों की सुरक्षा जैसे विषय शामिल हैं। राम सिंह मुंडा ने कहा कि इन मांगों में ऐसा कोई भी विषय नहीं है जो जनहित या क्षेत्रीय विकास के विरुद्ध हो। उन्होंने कहा कि विस्थापितों के अधिकारों की रक्षा करना आवश्यक है और इन मुद्दों पर गंभीरता से काम होना चाहिए।
अर्जुन मुंडा के प्रयास
उन्होंने कहा कि अर्जुन मुंडा ने केवल यह आग्रह किया था कि केंद्र सरकार के पूर्व निर्णयों और नीतिगत प्रावधानों के अनुसार प्रभावित परिवारों के हित में संवेदनशील कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि जनता को उसका लाभ मिल सके। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ सामाजिक व्यक्तियों द्वारा दिए जा रहे बयान और प्रतिक्रियाएं मूल मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास हैं। ग्रामसभा और पेसा कानून का भय दिखाकर ग्रामीणों को गुमराह किया जा रहा है।
लोकतांत्रिक संवाद पर जोर
राम सिंह मुंडा ने कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक और जनप्रतिनिधि को जनता से मिलने और उनकी समस्याएं उठाने का अधिकार है। मतभेद हो सकते हैं, लेकिन संवाद हमेशा लोकतांत्रिक और तथ्यपरक होना चाहिए। आदिवासी सुरक्षा परिषद ने UCIL प्रबंधन, जिला प्रशासन एवं संबंधित संस्थाओं से मांग की कि क्षेत्र में शांति, सौहार्द और लोकतांत्रिक वातावरण बनाए रखते हुए विस्थापित परिवारों की समस्याओं का समयबद्ध और पारदर्शी समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि “विस्थापितों का सम्मान, जनहित का समाधान और लोकतांत्रिक संवाद ही क्षेत्र के विकास का सशक्त मार्ग है।”
उपस्थित लोग
इस बैठक में पूर्व मुखिया प्रकाश सांडील, रामसाईं सोरेन, ईश्वर सोरेन, भाजपा नेता संजय सिंह मुंडा, भाजपा ST मोर्चा जिला अध्यक्ष रमेश बासके, जुझार समद, गणेश सरदार, मंगल कराई, देवाय दिग्गी, पाथोर दिग्गी, पूचू दिग्गी, रिया कुंकल, सरिता कुंकल, बबलू करूआ सहित अन्य लोग उपस्थित थे।