Jharkhand: करीब 70 करोड़ रुपये की पाइपलाइन पेयजल योजना को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अपर मुख्य सचिव को स्वयं साहिबगंज जाकर योजना का निरीक्षण करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि अपर मुख्य सचिव को 24 जुलाई तक विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट सौंपनी होगी। चीफ जस्टिस एम.एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने कहा कि यह जिम्मेदारी किसी अन्य अधिकारी को नहीं सौंपी जा सकती।
सरकार का दावा और याचिकाकर्ता की आपत्ति
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि 10 मार्च 2026 के आदेश के बाद पाइपलाइन जलापूर्ति योजना का कार्य पूरा कर लिया गया है और पाइपलाइन में आई लीकेज की समस्या भी ठीक कर दी गई है। वहीं, याचिकाकर्ता ने सरकार के दावों पर सवाल उठाया। कोर्ट में साहिबगंज नगर परिषद के 28 में से 21 वार्ड पार्षदों के बयान भी पेश किए गए, जिसमें कहा गया कि योजना अब तक पूरी तरह लागू नहीं हुई है। कई इलाकों में अब भी पानी का रिसाव हो रहा है और लोगों को नल कनेक्शन नहीं मिला है।
संयुक्त निरीक्षण का आदेश
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि अपर मुख्य सचिव, इंजीनियर-इन-चीफ, नगर परिषद अध्यक्ष तथा अन्य संबंधित अधिकारी संयुक्त रूप से स्थल का निरीक्षण करें। याचिकाकर्ता के प्रतिनिधि को भी निरीक्षण के दौरान मौजूद रहने की अनुमति दी गई है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि इस योजना पर भारी राशि खर्च की जा चुकी है, इसलिए प्रशासनिक लापरवाही के कारण जनता के धन की बर्बादी नहीं होनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि योजना का उद्देश्य हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है, जिसे सुनिश्चित करना जरूरी है। मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है।