Jharkhand News: लॉकडाउन के दौरान झारखंड के विभिन्न जिलों में कथित अवैध पेड़ कटाई के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने जांच की धीमी रफ्तार पर कड़ी नाराजगी जताई है. जस्टिस एसएन प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ ने राज्य सरकार से पूछा कि चार वर्ष बीत जाने के बावजूद अब तक जांच पूरी क्यों नहीं हो सकी.
CID की जांच पर भी कोर्ट ने उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मामले की जांच कर रही सीआईडी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए. अदालत ने जानना चाहा कि जांच की जिम्मेदारी सीआईडी को सौंपे जाने के बाद अब तक जांच किस चरण में पहुंची है. साथ ही कोर्ट ने यह भी पूछा कि सीआईडी की जांच फिलहाल केवल पांकी क्षेत्र तक ही क्यों सीमित है और अन्य जिलों में कथित अवैध पेड़ कटाई के मामलों में क्या कार्रवाई की गई है.
प्रार्थी ने लगाया लोगों को बचाने का आरोप
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि मामला सामने आने के बाद सरकार ने जांच सीआईडी को सौंप दी थी, लेकिन चार साल बाद भी जांच बेहद धीमी गति से चल रही है. प्रार्थी ने आरोप लगाया कि मामले में शामिल लोगों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है और इसी वजह से जांच में अपेक्षित प्रगति नहीं हो रही है.
दो सप्ताह में मांगा जवाब
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कथित बड़े षड्यंत्र के पहलू पर भी राज्य सरकार को विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया. अदालत ने सरकार से दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है. अब इस जनहित याचिका पर अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी.