NCLAT Verdict: देशभर के करोड़ों कर्मचारियों के लिए राहत भरे फैसले में नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने साफ कर दिया है कि अगर कोई कंपनी बंद हो जाए या दिवालिया घोषित हो जाए, तब भी कर्मचारियों का भविष्य निधि (PF) और ग्रेच्युटी का पैसा सुरक्षित रहेगा। इन वैधानिक बकायों को कंपनी की लिक्विडेशन संपत्ति का हिस्सा नहीं माना जाएगा और कर्मचारियों को उनका पूरा हक मिलेगा।
जेट एयरवेज मामले में आया अहम फैसला
NCLAT ने यह फैसला जेट एयरवेज के दिवालिया मामले में सुनाया है। ट्रिब्यूनल ने कहा कि कर्मचारियों का PF और ग्रेच्युटी उनका कानूनी अधिकार है। कंपनी ने अगर अलग से PF या ग्रेच्युटी फंड नहीं भी बनाया हो, तब भी कर्मचारियों का दावा खत्म नहीं होगा और उन्हें उनका भुगतान मिलना जरूरी है।
परिसमापक की होगी भुगतान सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी
ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि PF और ग्रेच्युटी की रकम को कंपनी की सामान्य संपत्ति मानकर दूसरे लेनदारों के बीच बांटा नहीं जा सकता। कंपनी के परिसमापक (Liquidator) की जिम्मेदारी होगी कि कर्मचारियों के इन वैधानिक बकायों का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
SBI समेत वित्तीय लेनदारों की दलील खारिज
इस मामले में SBI समेत कुछ वित्तीय लेनदारों ने तर्क दिया था कि PF और ग्रेच्युटी की सुरक्षा तभी मिलेगी, जब कंपनी ने पहले से अलग फंड बनाया हो। लेकिन NCLAT ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि कर्मचारियों का अधिकार कंपनी के फंड बनाने या न बनाने पर निर्भर नहीं करता।
कर्मचारियों के लिए भविष्य में बनेगा बड़ा उदाहरण
हालांकि जनवरी से मार्च 2019 तक के वेतन बकाये की मांग को ट्रिब्यूनल ने स्वीकार नहीं किया और कहा कि वेतन दावों का निपटारा IBC के नियमों के अनुसार होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि NCLAT का यह फैसला दिवालिया होने वाली कंपनियों के लाखों कर्मचारियों के लिए एक बड़ी मिसाल बनेगा और उनकी सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करेगा।