Air Marshal Dixit: भारतीय वायुसेना के शीर्ष नेतृत्व में बदलाव हुआ है. एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने मंगलवार को वाइस चीफ ऑफ द एयर स्टाफ का पदभार ग्रहण किया. उन्होंने एयर मार्शल नागेश कपूर की जगह यह जिम्मेदारी संभाली है, जो 30 जून 2026 को लगभग 40 वर्ष की सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए. रक्षा विशेषज्ञ इस नियुक्ति को वायुसेना की परिचालन क्षमता और रणनीतिक नेतृत्व के लिहाज से अहम मान रहे हैं.
तीन दशक से ज्यादा का परिचालन अनुभव बना सबसे बड़ी ताकत
एयर मार्शल दीक्षित का सैन्य सफर वर्ष 1986 में फाइटर स्ट्रीम से शुरू हुआ था. लंबे करियर के दौरान उन्होंने 3,500 घंटे से अधिक उड़ान भरते हुए कई तरह के लड़ाकू और परिवहन विमानों का संचालन किया. मिराज-2000, मिग सीरीज, जगुआर, तेजस, हॉक, आईएल-78, एएन-32, एवरो, किरण और एचपीटी-32 जैसे विमानों के संचालन का उन्हें व्यापक अनुभव है. वह एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट होने के साथ प्रशिक्षित फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर भी हैं.
युद्ध अभियानों से लेकर संयुक्त सैन्य रणनीति तक निभाई अहम जिम्मेदारी
अपने करियर में एयर मार्शल दीक्षित कई अहम सैन्य अभियानों का हिस्सा रहे हैं. कारगिल संघर्ष के दौरान चलाए गए ऑपरेशन सफेद सागर में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इसके अलावा ऑपरेशन रक्षक, कोप इंडिया और हाल में संचालित ऑपरेशन सिंदूर सहित कई सैन्य अभियानों और अभ्यासों में भी उन्होंने जिम्मेदारियां संभालीं.
उन्होंने सेंट्रल एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में कार्य किया. बाद में मुख्यालय एकीकृत रक्षा स्टाफ में चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ टू द चेयरमैन, चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी की जिम्मेदारी निभाई. इस कार्यकाल में तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय, संयुक्त सैन्य सिद्धांत और साझा परिचालन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कई पहल की गईं.
कई अहम पदों पर सेवाएं, चार प्रमुख सैन्य सम्मान से हुए सम्मानित
एयर मार्शल दीक्षित ने अपने करियर में एयर फोर्स टेस्ट पायलट्स स्कूल, वायु मुख्यालय, दक्षिणी वायु कमान और दक्षिण-पश्चिमी वायु कमान सहित कई महत्वपूर्ण संस्थानों और कमानों में नेतृत्व की जिम्मेदारी निभाई. उन्होंने एयर स्टाफ रिक्वायरमेंट, एयर डिफेंस, प्रोजेक्ट्स, प्लान्स और डिप्टी चीफ ऑफ एयर स्टाफ जैसे प्रमुख पदों पर भी सेवाएं दीं.
राष्ट्र के प्रति उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें समय-समय पर कई सैन्य अलंकरणों से सम्मानित किया गया. वर्ष 2006 में वायु सेना पदक, 2011 में विशिष्ट सेवा पदक, 2023 में अति विशिष्ट सेवा पदक और 2026 में परम विशिष्ट सेवा पदक से उन्हें सम्मानित किया जा चुका है. भारतीय वायुसेना के नए उप प्रमुख के रूप में उन्होंने आधिकारिक तौर पर कार्यभार संभाल लिया है.