Jharkhand Desi Liquor Sales Decline: झारखंड में पिछले पांच वित्तीय वर्षों के दौरान देसी शराब की बिक्री में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. उत्पाद विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2020-21 में जहां राज्य में 75.30 लाख लंदन प्रूफ लीटर (LPL) देसी शराब बिकी थी, वहीं वित्तीय वर्ष 2025-26 में यह घटकर 25.78 लाख LPL रह गई. इस तरह पांच साल में देसी शराब की बिक्री करीब 75 फीसदी कम हुई है.
देसी शराब की बिक्री में आई इस गिरावट के बाद आशंका जताई जा रही है कि कम कीमत में शराब खरीदने वाले लोग अब महुआ से बनने वाली अवैध शराब की ओर रुख कर सकते हैं. इससे जहरीली शराब से होने वाली घटनाओं और अवैध कारोबार बढ़ने का खतरा भी पैदा हो सकता है.
देसी शराब की बिक्री का पांच साल का आंकड़ा
- वित्तीय वर्ष 2020-21 में 75.30 लाख LPL देसी शराब की बिक्री हुई.
- वित्तीय वर्ष 2021-22 में बिक्री घटकर 69.43 लाख LPL रह गई.
- वित्तीय वर्ष 2022-23 में यह आंकड़ा 27.24 लाख LPL तक पहुंच गया.
- वित्तीय वर्ष 2023-24 में सबसे कम 14.71 लाख LPL देसी शराब की बिक्री दर्ज की गई.
- वित्तीय वर्ष 2024-25 में बिक्री 15.89 लाख LPL रही.
- वित्तीय वर्ष 2025-26 में बिक्री बढ़कर 25.78 लाख LPL हुई, लेकिन यह पांच साल पहले के स्तर से काफी कम है.
पैकेजिंग बदलने से बढ़ी कीमत, घटे ग्राहक
जानकारों के अनुसार, देसी शराब की बिक्री में गिरावट की प्रमुख वजह पैकेजिंग और कीमत में बदलाव है. पहले देसी शराब प्लास्टिक पाउच में उपलब्ध होती थी, जिससे इसकी कीमत अपेक्षाकृत कम रहती थी. वर्ष 2022 की उत्पाद नीति लागू होने के बाद देसी शराब को कांच की बोतलों में बेचना शुरू किया गया.
कांच की बोतल में बिक्री शुरू होने से देसी शराब की कीमत बढ़ गई. इसका असर खासकर कम आय वर्ग के ग्राहकों पर पड़ा और उन्होंने वैध देसी शराब खरीदना कम कर दिया. पहले सस्ती और वैध देसी शराब उपलब्ध होने के कारण कई लोग महुआ से बनी अवैध शराब से दूर रहते थे, लेकिन अब उनके दोबारा अवैध शराब की ओर जाने की आशंका बढ़ गई है.
शराब राजस्व में भी घटी हिस्सेदारी
देसी शराब की बिक्री घटने से राज्य के शराब राजस्व में इसकी हिस्सेदारी भी कम हुई है. पहले कुल शराब राजस्व में देसी शराब का योगदान करीब 8 से 9 फीसदी तक था. अब यह घटकर लगभग 1.5 फीसदी रह गया है.
देसी शराब की बिक्री में हाल के वित्तीय वर्ष में कुछ सुधार जरूर दिखा है, लेकिन उत्पाद विभाग के सामने चुनौती यह है कि वैध शराब की पहुंच और कीमत के बीच संतुलन बनाते हुए अवैध महुआ शराब के कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण कैसे किया जाए.