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  • 2026-07-03

Bokaro News: बोकारो का चर्चित पुष्पा महतो हत्याकांड, आरोपी प्रेमी दिनेश के कबूलनामे के वीडियो बयान से हुआ बड़ा खुलासा, शादी के दबाव में सुनसान जंगल में रेता था गला

Bokaro: "मेरी बेटी कॉलेज के लिए निकली थी, लेकिन वापस नहीं लौटी, मैं थाने के चक्कर काटती रही, रोती रही, लेकिन पुलिस का दिल नहीं पसीजा।" यह उस बेबस मां की चीख है, जिसने महीनों अपनी लाडली पुष्पा के लौटने का इंतजार किया। चास कॉलेज की मेधावी छात्रा पुष्पा महतो की निर्मम हत्या के इस मामले में अब एक ऐसा निर्णायक मोड़ आया है, जो दिल को झकझोर देने वाला है. पुलिस कस्टडी में मुख्य आरोपी और पुष्पा के प्रेमी दिनेश कुमार महतो का वीडियोग्राफी के जरिए दर्ज किया गया बयान अब इस पूरे केस का सबसे बड़ा साक्ष्य बन चुका है। यह वीडियो सिर्फ हत्यारे दिनेश को उसके अंजाम तक ही नहीं पहुंचाएगा, बल्कि चंद रुपयों और शराब की खातिर एक मां के आंसुओं का सौदा करने वाले पिंड्राजोरा थाना के तत्कालीन प्रभारी (2018 बैच) अभिषेक रंजन और मुंशी के चेहरे से भी नकाब हटाएगा।

26 बेकसूर पुलिसकर्मियों का निलंबन खत्म, असली गुनहगारों पर गिरेगी गाज
इस पूरे मामले में एक बड़ा प्रशासनिक अपडेट भी है। पिंड्राजोरा थाने के जिन 28 पुलिसकर्मियों को एक साथ सस्पेंड किया गया था, उनमें से 26 को पूर्व सिटी डीएसपी आलोक रंजन की गहन जांच के बाद निर्दोष पाते हुए निलंबन मुक्त कर दिया गया है। जांच में साफ हो गया कि इस घिनौने खेल और घूसकांड में बाकी पुलिसकर्मियों का कोई हाथ नहीं था। सारा खेल सिर्फ तत्कालीन थाना प्रभारी अभिषेक रंजन और मुंशी का था। अब खाकी को दागदार करने वाले इन दोनों मुख्य दोषियों के खिलाफ विभागीय जांच और सेवा से बर्खास्तगी की कानूनी प्रक्रिया को तेज कर दिया गया है।

शराब और रुपयों की खातिर जिला कप्तान को किया गुमराह
सूबे की डीजीपी तदाशा मिश्रा के निर्देश पर जब बोकारो के तत्कालीन एसपी हरविंदर सिंह ने आरोपी दिनेश महतो से कड़ाई से पूछताछ की, तो रक्षक ही भक्षक निकले। पता चला कि थाना प्रभारी अभिषेक रंजन मुख्य आरोपी से कथित तौर पर नकद और शराब के रूप में मोटी घूस लेकर जांच को लगातार भटका रहा था और अपने ही जिला कप्तान को गुमराह कर रहा था। इसी संवेदनहीनता को देखते हुए तत्कालीन एसपी ने पूरे थाने को सस्पेंड कर दिया था। अब पाक-साफ निकले 26 कर्मियों को राहत मिल गई है, जबकि दोषी थाना प्रभारी और मुंशी पर कानून का शिकंजा कस चुका है।

जुलाई 2025 से शुरू हुआ था सिस्टम की क्रूरता का खेल
एक गरीब मजदूर परिवार की होनहार बेटी पुष्पा महतो 21 जुलाई 2025 को कॉलेज में फॉर्म जमा करने घर से निकली थी। जब वह नहीं लौटी, तो उसकी बेबस मां रेखा देवी रोती-बिलखती पिंड्राजोरा थाना पहुंचीं। लेकिन पैसों के नशे में चूर पुलिस का दिल नहीं पसीजा। शिकायत लेने से मना कर दिया गया और उस लाचार मां को थाने से दौड़ाया जाता रहा।

बूढ़े और लाचार पिता को पुणे स्टेशन पर भीख मांगने को छोड़ा!
हद तो तब हो गई जब महीनों बाद पुलिस जांच के नाम पर माता-पिता को प्रताड़ित करती रही। दिसंबर 2025 में जब पुष्पा के पुणे में होने की झूठी सूचना मिली, तो पुलिस टीम मृतका के पिता को साथ लेकर पुणे तो गई, लेकिन वहां उस बूढ़े और लाचार पिता को अकेले स्टेशन पर छोड़कर पुलिसकर्मी भाग निकले। इस दौरान पिता का फोन भी चोरी हो गया और वह किसी तरह भीख मांगकर, भूखे-प्यासे रोते हुए वापस अपने घर लौटे। सिस्टम की इससे बड़ी क्रूरता और क्या हो सकती है?

हाई कोर्ट की फटकार के बाद जागी खाकी, कंकाल देखकर फटी रह गईं मां की आंखें
स्थानीय पुलिस के इस अमानवीय रवैये से टूट चुके पीड़ित परिवार ने अंततः सामाजिक कार्यकर्ताओं की मदद से झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। फरवरी 2026 में हाईकोर्ट के जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ ने पुलिस को ऐसी कड़ी फटकार लगाई कि पूरा महकमा हिल गया। डीजीपी के निर्देश पर डीआईजी संध्या रानी मेहता के नेतृत्व में एसआईटी (SIT) का गठन हुआ। एसआईटी ने जब पुष्पा के प्रेमी दिनेश कुमार महतो को दबोचा, तो उसने जो सच उगला, उसने सबकी रूह कंपा दी।

शादी के दबाव से पीछा छुड़ाने के लिए रेत दिया था गला
आरोपी दिनेश ने कबूल किया कि वह और पुष्पा पिछले तीन साल से प्रेम संबंध में थे। पुष्पा लगातार उस पर शादी का दबाव बना रही थी। इसी से पीछा छुड़ाने के लिए उसने 21 जुलाई 2025 को पुष्पा को चास कॉलेज के पास बुलाया और बहला-फुसलाकर पास के सुनसान जंगल में ले गया। वहां उसने चाकू से रेतकर पुष्पा की निर्मम हत्या कर दी और शव को झाड़ियों में फेंक दिया। आरोपी की निशानदेही पर घटना के करीब 8-9 महीने बाद जब पुलिस झाड़ियों में पहुंची, तो वहां सिर्फ पुष्पा का क्षत-विक्षत कंकाल मिला। बेटी का वह रूप देखकर मां-बाप के पैरों तले जमीन खिसक गई। आज आरोपी का वीडियो बयान और दोषी पुलिसकर्मियों पर होती कार्रवाई भले ही इस गरीब परिवार को उनकी लाडली वापस नहीं लौटा सकती, लेकिन न्याय के लिए तड़प रही एक मां और दर-दर भटके पिता की आत्मा को यह तसल्ली जरूर देगी कि उनकी बेटी के गुनहगार अब बच नहीं पाएंगे।



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