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  • 2026-07-04

Jharkhand Politics : झारखंड की राजनीति में चिट्ठियों पर छिड़ी सियासी जंग, मंत्रियों के बीच बढ़ी बयानबाजी

Jharkhand Politics : झारखंड की राजनीति में इन दिनों चिट्ठियों और सार्वजनिक बयानों को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर द्वारा लिखे गए लगातार पत्रों और उस पर अन्य मंत्रियों की प्रतिक्रियाओं ने सरकार और कांग्रेस संगठन के भीतर चल रही गतिविधियों को लेकर नई राजनीतिक चर्चा शुरू कर दी है। इसी बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के दिल्ली दौरे को लेकर भी अलग-अलग राजनीतिक कयास लगाए जा रहे हैं।


राधाकृष्ण किशोर के पत्रों से बढ़ी राजनीतिक चर्चा, इरफान अंसारी से हुई जुबानी जंग

सियासी घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कांग्रेस के झारखंड प्रभारी के. राजू को पत्र लिखकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश के नेतृत्व और संगठन की कार्यशैली पर सवाल उठाए। इसके बाद उन्होंने पुलिस महानिदेशक (DGP) को पत्र लिखकर अपनी सुरक्षा व्यवस्था पर आपत्ति जताई और अपनी सुरक्षा में तैनात सभी जवानों तथा सरकारी वाहनों को वापस कर दिया। इस फैसले पर स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ऐसे मामलों पर सार्वजनिक पत्राचार के बजाय सरकार के भीतर चर्चा होनी चाहिए। इसके जवाब में राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि यदि उन्हें डीजीपी को पत्र नहीं लिखना चाहिए था, तो स्वास्थ्य मंत्री को भी रिम्स के निदेशक को पत्र नहीं लिखना चाहिए था। इसके बाद दोनों मंत्रियों के बीच बयानबाजी खुलकर सामने आ गई।

मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे पर भी शुरू हुई अटकलें, सरकार की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं

इसी घटनाक्रम के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी पत्नी कल्पना सोरेन के साथ दिल्ली रवाना हुए। उनके इस दौरे को लेकर कोई आधिकारिक कार्यक्रम सार्वजनिक नहीं किया गया है। बताया जा रहा है कि वह 5 या 6 जुलाई को रांची लौट सकते हैं, जबकि 8 और 9 जुलाई को दिल्ली में आयोजित स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन कार्यक्रम में उनकी भागीदारी प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री के इस दौरे के समय को लेकर राजनीतिक हलकों में विभिन्न तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि, सरकार की ओर से इन अटकलों की पुष्टि नहीं की गई है। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि हालिया पत्राचार और सार्वजनिक प्रतिक्रियाओं ने झारखंड की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है, जबकि इन घटनाओं के व्यापक राजनीतिक अर्थों पर अभी कोई आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।


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