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  • 2025-06-23

Shravani Fair 2025: भगवान शिव की आराधना का पावन समय,जानिए सावन महीना का महत्व

Shravani Fair 2025: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना का अत्यंत पावन और शुभ समय माना जाता है। इस महीने का शिवभक्त पूरे वर्ष इंतजार करते हैं, क्योंकि यह काल व्रत, पूजा और रुद्राभिषेक जैसे धार्मिक अनुष्ठानों के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। सावन में शिवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ती है और वातावरण "हर हर महादेव" के जयघोष से गूंज उठता है।
कांवड़ यात्रा की शुरुआत सावन माह के पहले दिन से ही होती है, इसलिए वर्ष 2025 में यह पवित्र यात्रा 11 जुलाई से आरंभ मानी जाएगी। यह यात्रा सावन शिवरात्रि तक चलती है, जो इस बार अगस्त के प्रारंभ में आएगी। इस दौरान श्रद्धालु पवित्र गंगाजल लेकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं।
कांवड़ यात्रा एक पवित्र धार्मिक यात्रा है, जिसमें शिवभक्त पवित्र गंगाजल लेकर पैदल यात्रा करते हैं और अपने क्षेत्र के निकटवर्ती शिव मंदिर में शिवलिंग का अभिषेक करते हैं। यह परंपरा अत्यंत प्राचीन मानी जाती है और कहा जाता है कि इसकी शुरुआत स्वयं भगवान परशुराम ने की थी।
सावन माह का आरंभ इस वर्ष 11 जुलाई की रात 2 बजकर 6 मिनट से कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि के साथ होगा, जो 12 जुलाई की रात 2 बजकर 8 मिनट तक रहेगी। इसी के आधार पर सावन माह की शुरुआत 11 जुलाई 2025 से मानी जाएगी। यह पावन महीना 9 अगस्त 2025 को समाप्त होगा।
कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है, इसलिए प्रशासन को सुरक्षा और सुविधा के लिए विशेष इंतजाम करने पड़ते हैं। जगह-जगह पर शिविर लगाए जाते हैं, जहां श्रद्धालुओं को खाने-पीने और आराम करने की सुविधा प्रदान की जाती है।
कांवड़ यात्रा का महत्व और लाभ बहुत अधिक है। यह यात्रा न केवल भगवान शिव की भक्ति का प्रतीक है, बल्कि यह यात्रा श्रद्धालुओं को आत्मशुद्धि और आत्मसाक्षात्कार की ओर भी ले जाती है। कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को अपने मन को शुद्ध करने और भगवान शिव की भक्ति में लीन होने का अवसर मिलता है।
सावन का महीना भगवान शिव की आराधना का पावन समय है, जिसमें श्रद्धालु भगवान शिव की भक्ति में लीन होते हैं। कांवड़ यात्रा इस महीने की एक महत्वपूर्ण परंपरा है, जिसमें श्रद्धालु पवित्र गंगाजल लेकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। यह यात्रा न केवल भगवान शिव की भक्ति का प्रतीक है, बल्कि यह यात्रा श्रद्धालुओं को आत्मशुद्धि और आत्मसाक्षात्कार की ओर भी ले जाती है।
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