Sabbe Encounter Jamshedpur: जमशेदपुर के मानगो क्षेत्र अंतर्गत डिमना रोड स्थित मुंशी मोहल्ला मजार लाइन के पास बुधवार शाम को प्रेम प्रसंग के विवाद में राहुल बच्चा नामक युवक की गोली मारकर बेरहमी से हत्या कर दी गई थी. वह अपनी स्प्लेंडर बाइक पर बैठा था, तभी शंकोसाई निवासी साहिब सिंह उर्फ सब्बे अपने 20-30 साथियों के साथ वहां पहुंचा और ताबड़तोड़ गोलीबारी करने के साथ-साथ पत्थर और डंडों से हमला कर दिया. घायल राहुल को तुरंत टाटा मेन हॉस्पिटल (TMH) ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. दोस्तों के मुताबिक, राहुल और मुख्य आरोपी सब्बे एक ही युवती से बातचीत करते थे, जिसे लेकर सब्बे ने दो दिन पहले इंस्टाग्राम पर जान से मारने की धमकी भी दी थी. इस वारदात के बाद आरोपी साहिब सिंह उर्फ सब्बे ने अपने साथियों के साथ पुलिस के समक्ष सरेंडर कर दिया था.
पुलिस एनकाउंटर में नया मोड़, मामी ने लगाए संगीन आरोप
इस हत्याकांड के बाद आज गुरुवार सुबह पुलिस की कार्रवाई में हुए एनकाउंटर को लेकर एक नया मोड़ आ गया है. इस मुठभेड़ में आरोपी के पैर में गोली लगने के बाद उसकी मामी ने मीडिया के सामने आकर पुलिस प्रशासन पर बेहद गंभीर और संगीन आरोप लगाए हैं. परिजनों का दावा है कि पुलिस ने सब्बे को जानबूझकर दौड़ाकर पीछे से गोली मारी है. परिवार ने इस पूरी पुलिसिया कार्रवाई पर सवाल खड़े करते हुए जिला प्रशासन और सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराने की पुरजोर मांग की है.
"सरेंडर की बात कहकर पुलिस ने मारी गोली, खबरों से मिली जानकारी"
घायल आरोपी की मामी ने बताया कि बुधवार को पुलिस ने खुद परिजनों को बुलाया था और मीडिया के सामने सुरक्षित सरेंडर (आत्मसमर्पण) कराने की बात कही थी. परिवार ने कानून पर भरोसा जताते हुए पुलिस की बात मान ली थी ताकि मामला सामान्य हो जाए. हालांकि, परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने एनकाउंटर या गोली लगने की कोई जानकारी समय पर परिवार को नहीं दी. उन्हें सब्बे को गोली लगने की यह खबर गुरुवार की न्यूज चैनलों के माध्यम से मिली. परिजनों के अनुसार, गोली उसके शरीर के पिछले हिस्से और घुटने के पास लगी है, जो पुलिस की नीयत पर सवाल उठाती है.
परिजनों ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल किया कि "अगर उससे से कोई गलती हुई थी या वह भाग रहा था, तो पुलिस उसे डंडे के बल पर काबू कर सकती थी, लेकिन उसे सीधे गोली मारने की क्या जरूरत थी?" इसके साथ ही परिवार ने आरोप लगाया कि एनकाउंटर के बाद जब वे सुबह एमजीएम अस्पताल पहुंचे, तो वहां तैनात पुलिसकर्मियों ने उन्हें वार्ड के भीतर जाने से रोक दिया और जबरन बाहर निकाल दिया. फिलहाल, पुलिस के आला अधिकारियों की ओर से परिजनों द्वारा लगाए गए इन गंभीर और संवेदनशील आरोपों पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.