Jharkhand Cooperative Bank Scam: झारखंड राज्य कॉपरेटिव बैंक से जुड़े कथित 50 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच के बीच अब बैंक के वित्तीय रिकॉर्ड पर भी सवाल उठने लगे हैं. आरोप है कि वर्ष 2018 की बैलेंस शीट में दर्ज चेक परचेज मद की 16.29 करोड़ रुपये की राशि अगले साल की बैलेंस शीट से हटा दी गई. मामले की जांच फिलहाल सीआईडी और प्रवर्तन निदेशालय अलग-अलग स्तर पर कर रहे हैं.
जांच में चेक परचेज से जुड़े लेनदेन पर उठे सवाल
सरायकेला कॉपरेटिव बैंक में कथित वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत मिलने के बाद राज्य सरकार ने जांच कराई थी. जांच रिपोर्ट में कई गड़बड़ियों का जिक्र किया गया. रिपोर्ट के अनुसार कारोबारी संजय डालमिया को बैंक की तय व्यवस्था के विपरीत चेक परचेज के नाम पर करीब 15.44 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए. दावा किया गया कि कारोबारी ने बड़े ठेके मिलने और बाद में भुगतान आने पर बैंक की राशि समायोजित करने की बात कही थी. हालांकि जांच के दौरान संबंधित चेक उपलब्ध नहीं मिला. आरोप यह भी है कि बैंक में इस तरह की चेक परचेज सुविधा की वैधानिक व्यवस्था ही मौजूद नहीं थी.
आवेदन के आधार पर रकम जारी करने और दस्तावेज नहीं मिलने का दावा
जांच में यह आरोप भी लगाया गया कि इतनी बड़ी राशि केवल आवेदन के आधार पर जारी कर दी गई. दावा है कि यह रकम सीधे संबंधित कारोबारी के खाते में नहीं गई, बल्कि उससे जुड़ी पिंटू इंजीनियरिंग कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड और एसकेएम इंफ्रावेंचर प्राइवेट लिमिटेड के खातों में ट्रांसफर की गई. जांच समिति के मुताबिक आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए और जिस चेक के आधार पर भुगतान का दावा किया गया, वह भी जांच टीम को नहीं मिला. रिपोर्ट में बैंक अधिकारियों और संबंधित कारोबारी के बीच कथित मिलीभगत की आशंका जताई गई है.
बैलेंस शीट में बदलाव को लेकर बढ़े संदेह
मामले में पहले ही स्थानीय थाने में दो अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी हैं, जिनमें बैंक के कई तत्कालीन अधिकारियों को आरोपी बनाया गया है. अब उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर यह आरोप भी सामने आया है कि वर्ष 2018 की बैलेंस शीट के प्वाइंट नंबर 59 में चेक परचेज मद के तहत दर्ज 16.29 करोड़ रुपये की एंट्री वर्ष 2019 की बैलेंस शीट में शून्य कर दी गई. वहीं इस राशि की वसूली, समायोजन या निपटान का कोई स्पष्ट उल्लेख रिकॉर्ड में नहीं मिला. आरोप लगाया जा रहा है कि वित्तीय रिकॉर्ड में बदलाव कर मामले से जुड़े प्रभावशाली लोगों को बचाने की कोशिश की गई. समाचार लिखे जाने तक संबंधित पक्ष की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. जांच एजेंसियां पूरे मामले की पड़ताल कर रही हैं.