RIMS-2 Ranchi: रांची में प्रस्तावित RIMS-2 परियोजना को लेकर नगड़ी इलाके में विरोध लगातार तेज होता जा रहा है. राज्य सरकार द्वारा मंत्रिपरिषद की बैठक में परियोजना को पूर्व निर्धारित स्थल पर ही विकसित करने के फैसले के बाद शनिवार को बड़ी संख्या में रैयत और ग्रामीण लोक भवन के बाहर एकत्र हुए. प्रदर्शनकारियों ने सरकार के निर्णय का विरोध करते हुए स्पष्ट कहा कि वे अपनी कृषि योग्य जमीन किसी भी हाल में नहीं छोड़ेंगे.
कैबिनेट के फैसले के बाद बढ़ा विरोध
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार ने RIMS-2 निर्माण को लेकर फैसला तो ले लिया, लेकिन प्रभावित परिवारों की सहमति और उनकी चिंताओं को नजरअंदाज किया गया. प्रदर्शन में शामिल लोगों ने कहा कि जिस जमीन पर अस्पताल बनाने की योजना है, वही उनकी रोजी-रोटी का प्रमुख साधन है. ऐसे में जमीन देने का सवाल ही नहीं उठता.
अधिग्रहण प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
रैयतों ने दावा किया कि संबंधित भूमि का अब तक कानूनी तरीके से अधिग्रहण नहीं किया गया है. उनका कहना है कि न तो उन्होंने सरकार के पक्ष में जमीन हस्तांतरित की है और न ही किसी प्रकार का मुआवजा स्वीकार किया है. प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि जमीन से जुड़े रिकॉर्ड और दस्तावेजों में भी कई तरह की अनियमितताएं हैं. उन्होंने पूरे मामले की न्यायिक या किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग की.
"बिना सहमति परियोजना स्वीकार नहीं"
ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार ने प्रभावित परिवारों के साथ कोई ठोस संवाद नहीं किया और उनकी राय लिए बिना ही परियोजना को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू कर दी. प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने जमीन से जुड़े मामले में सरकार पर गंभीर आरोप भी लगाए. हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है.
आंदोलन जारी रखने का ऐलान
प्रदर्शन में शामिल रैयतों ने कहा कि जब तक उनकी जमीन सुरक्षित नहीं रहती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा. उनका कहना था कि यह केवल जमीन का मुद्दा नहीं, बल्कि किसानों के अधिकार, आजीविका और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा सवाल है. इसलिए वे अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने वाले नहीं हैं.