US Israel Tensions: ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने इज़राइल में अपनी सैन्य मौजूदगी और मजबूत करने का फैसला किया है. रिपोर्टों के मुताबिक, लंबी दूरी के सैन्य अभियानों को समर्थन देने के लिए अतिरिक्त एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग विमान इज़राइल भेजे जा रहे हैं. इस कदम को पश्चिम एशिया में अमेरिकी रणनीति के बड़े विस्तार के रूप में देखा जा रहा है.
इज़राइल में बढ़ाई गई सैन्य तैनाती
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने इज़राइल को पहले ही अतिरिक्त रिफ्यूलिंग विमानों की तैनाती की जानकारी दे दी थी. ये विमान लड़ाकू और बॉम्बर विमानों को उड़ान के दौरान ही ईंधन उपलब्ध कराते हैं, जिससे वे बिना रुके लंबी दूरी तक मिशन पूरा कर सकते हैं. फिलहाल इज़राइल में 60 से अधिक अमेरिकी रिफ्यूलिंग विमान मौजूद हैं. इनमें करीब 30 विमान तेल अवीव के पास बेन गुरियन अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे और लगभग 30 दक्षिणी इज़राइल के रेमन एयरबेस पर तैनात बताए गए हैं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आने वाले दिनों में और विमान भेजे जा सकते हैं.
ईरान को लेकर कई सैन्य विकल्पों पर चर्चा
रिपोर्ट के मुताबिक, व्हाइट हाउस में हुई उच्चस्तरीय बैठक में ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य विकल्पों पर विचार किया गया. इनमें बिजली संयंत्रों, अहम आर्थिक और सैन्य ढांचे, संदिग्ध परमाणु सुविधाओं तथा भूमिगत परमाणु ठिकानों को संभावित लक्ष्य के रूप में शामिल किए जाने की बात कही गई है. बताया जा रहा है कि अमेरिका ईरान पर दबाव बढ़ाकर होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने और परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी अपनी शर्तें मनवाने की रणनीति पर काम कर रहा है.
क्षेत्र में हमले तेज, तनाव और बढ़ा
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने लगातार सातवें दिन भी ईरान से जुड़े ठिकानों पर हवाई अभियान जारी रखा. इन हमलों में कई पुल, सैन्य लॉजिस्टिक केंद्र और रडार साइट्स को निशाना बनाए जाने का दावा किया गया है. वहीं जवाबी कार्रवाई में ईरान ने कुवैत, कतर, बहरीन, जॉर्डन और इराक में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले तेज करने का दावा किया है. हालांकि दोनों पक्षों के सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है. समाचार लिखे जाने तक इस पूरे घटनाक्रम पर कोई नई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी.