Sonam Wangchuk Hunger Strike: अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक मामलों में जवाबदेही और छात्रों के हितों को लेकर केंद्र सरकार के सामने नई शर्त रखी है. उन्होंने कहा है कि आंदोलन में शामिल छात्रों और युवाओं के खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक या कानूनी कार्रवाई नहीं करने का सरकार लिखित आश्वासन दे. ऐसा होने पर ही वह अपना अनशन समाप्त करने पर विचार करेंगे.
केंद्रीय मंत्रियों को लिखा खुला पत्र
सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के नाम एक खुला पत्र साझा किया. उन्होंने बताया कि मंगलवार देर रात दोनों मंत्री अस्पताल में उनसे मिलने पहुंचे थे और अनशन समाप्त करने का आग्रह किया था.
सरकार ने मांगों पर सकारात्मक विचार का दिया भरोसा
वांगचुक ने पत्र में लिखा कि बातचीत के दौरान मंत्रियों ने उनकी प्रमुख मांगों पर सकारात्मक विचार करने का आश्वासन दिया. इनमें पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने, शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर संसद में सार्थक चर्चा कराने और अन्य सुधारात्मक कदमों पर विचार शामिल है. उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे का मुद्दा भी चर्चा में आया.
"छात्रों पर कोई कार्रवाई नहीं होनी चाहिए"
सोनम वांगचुक ने 20 जुलाई को हुए “चलो संसद” मार्च का जिक्र करते हुए कहा कि पुलिस कार्रवाई के बावजूद प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा. उन्होंने कहा कि देश और दुनिया ने देखा कि युवाओं ने लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखी. इसलिए आंदोलन में शामिल किसी भी छात्र या युवा के खिलाफ प्रतिशोध की भावना से कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए.
65 सांसदों ने अनशन खत्म करने की अपील की
उन्होंने बताया कि केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के करीब 65 सांसदों ने उन्हें पत्र लिखकर अनशन समाप्त करने का आग्रह किया है. कई सांसद व्यक्तिगत रूप से भी उनसे मिलने पहुंचे हैं. सभी ने उनसे देश और शिक्षा के क्षेत्र में अपना योगदान जारी रखने की अपील की.
"युवाओं के हितों से समझौता नहीं कर सकता"
वांगचुक ने स्पष्ट किया कि केवल व्यक्तिगत आग्रह के आधार पर वह अनशन समाप्त नहीं करेंगे. उन्होंने लिखा कि वह जीना चाहते हैं और शिक्षा के क्षेत्र में वापस लौटना चाहते हैं, लेकिन जिन युवाओं के लिए यह आंदोलन शुरू किया गया, उनके हितों की अनदेखी कर ऐसा नहीं कर सकते.
लिखित आश्वासन मिलने पर ही खत्म होगा अनशन
सोनम वांगचुक ने कहा कि यदि सरकार स्पष्ट रूप से यह भरोसा देती है कि आंदोलन में शामिल युवाओं के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी और आगे पुलिस बल प्रयोग से भी बचा जाएगा, तो वह विश्वास के साथ अपना अनशन समाप्त कर देंगे. अन्यथा उनका अनिश्चितकालीन अनशन जारी रहेगा.
उन्होंने अपने पत्र के अंत में कहा कि किसी भी लोकतंत्र की मजबूती इस बात से तय होती है कि वह असहमति रखने वाले नागरिकों, विशेषकर युवाओं, के साथ कैसा व्यवहार करता है. लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले युवाओं की आवाज सुनना सरकार की जिम्मेदारी है.