भारत को 10 प्रतिशत टैरिफ श्रेणी में मिली राहत
अमेरिकी प्रशासन के मुताबिक शुरुआत में भारत को अधिक टैरिफ वाले समूह में रखने पर विचार किया गया था. बाद में श्रम मानकों से जुड़े पहलुओं की समीक्षा और बातचीत के बाद भारत को 10 प्रतिशत टैरिफ श्रेणी में शामिल किया गया. इससे भारतीय निर्यातकों पर अतिरिक्त शुल्क का असर अपेक्षाकृत कम रहने की उम्मीद है.
नई टैरिफ व्यवस्था लागू, कई देशों पर बढ़ा शुल्क
1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत नई टैरिफ व्यवस्था लागू हो गई है. इससे पहले लागू अस्थायी 10 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ की अवधि समाप्त हो चुकी है. अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय के अनुसार पहले से परिवहन में मौजूद सामान को 28 जुलाई तक छूट मिलेगी. भारत के अलावा ब्रिटेन, कनाडा, मेक्सिको, बांग्लादेश, पाकिस्तान, मलेशिया, इंडोनेशिया, कंबोडिया, श्रीलंका, जॉर्डन, अर्जेंटीना, इक्वाडोर, अल सल्वाडोर, ग्वाटेमाला, होंडुरास और त्रिनिदाद एंड टोबैगो भी 10 प्रतिशत टैरिफ वाले समूह में शामिल हैं. वहीं कुछ अन्य देशों के उत्पादों पर 12.5 प्रतिशत टैरिफ लागू किया गया है.
16 देशों की जांच जारी, कुछ उत्पाद टैरिफ से बाहर
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर के अनुसार मजबूरन श्रम से जुड़े उत्पादों को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता बनी हुई है. इसी कारण 16 देशों के खिलाफ अलग से जांच शुरू की गई है और जांच पूरी होने के बाद आगे अतिरिक्त टैरिफ लगाने पर फैसला लिया जा सकता है. हालांकि तेल और गैस, उर्वरक, कुछ खाद्य उत्पाद, स्टील, एल्युमीनियम, तांबा, ऑटोमोबाइल और अमेरिका-मेक्सिको-कनाडा व्यापार समझौते के तहत शुल्क मुक्त उत्पादों को नई व्यवस्था से बाहर रखा गया है. फिलहाल टैरिफ लागू हो चुके हैं, जबकि जांच की प्रक्रिया जारी है.