Jharkahnd News : झारखंड हाईकोर्ट में भुइहर समुदाय के नाम में कथित त्रुटि को लेकर एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। याचिका में ट्राइबल वेलफेयर रिसर्च इंस्टीट्यूट (TRI) की अंतिम रिपोर्ट और उससे संबंधित सरकारी दस्तावेजों में समुदाय का नाम संशोधित करने की मांग की गई है।
TRI रिपोर्ट के शीर्षक में नाम को लेकर विवाद
याचिकाकर्ता का कहना है कि छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम, 1908 के तहत तैयार सभी मूल खतियानों और राजस्व अभिलेखों में समुदाय का आधिकारिक नाम केवल भुइहर दर्ज है। जबकि TRI की अंतिम अनुसंधान रिपोर्ट के शीर्षक में समुदाय का नाम भूईंहर मुंडा / भुईंहर अंकित किया गया है।
भुइहर ट्राइब राइट्स होल्डर्स कमेटी की ओर से अधिवक्ता अच्युत स्वरूप मिश्रा द्वारा दायर याचिका में राज्य सरकार को निर्देश देने की मांग की गई है कि वह TRI की अंतिम रिपोर्ट और संबंधित सभी सरकारी दस्तावेजों में नाम का संशोधन कर संशोधित अनुशंसा निर्धारित समय सीमा के भीतर भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय और रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया (RGI) को भेजे।
गलत नाम से भविष्य में प्रमाण-पत्र मिलने में हो सकती है परेशानी
याचिका के अनुसार, झारखंड सरकार ने वर्ष 2020 में भुइहर समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) सूची में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू की थी। TRI ने समुदाय का सामाजिक, सांस्कृतिक और नृवंशीय अध्ययन कर इसे एसटी सूची में शामिल करने की अनुशंसा की थी, जिसे वर्ष 2021 में राज्य सरकार ने केंद्र सरकार को भेजा था।
इसके बाद वर्ष 2023 में रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया (RGI) ने कुछ अतिरिक्त स्पष्टीकरण मांगे, जिसके आधार पर TRI ने 11 दिसंबर 2024 को अंतिम पुनः अनुसंधान रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी।
याचिका में आशंका जताई गई है कि यदि इसी कथित त्रुटिपूर्ण नाम के आधार पर केंद्र सरकार अनुसूचित जनजाति की अधिसूचना जारी करती है, तो भविष्य में भुइहर समुदाय के हजारों लोगों को अनुसूचित जनजाति प्रमाण-पत्र प्राप्त करने में कानूनी और प्रशासनिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि उनके भूमि अभिलेखों में दर्ज नाम और अधिसूचना में प्रकाशित नाम अलग-अलग होंगे।