Supreme Court Bar Council Order: सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित हाई-पावर्ड इलेक्शन सुपरवाइजरी कमिटी ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को बड़ा झटका देते हुए 19 जुलाई 2026 के उस प्रस्ताव पर रोक लगा दी है, जिसमें राज्य बार काउंसिलों की सीटों की संख्या बढ़ाने की बात कही गई थी. कमिटी ने स्पष्ट किया कि चुनाव प्रक्रिया के बीच या परिणाम घोषित होने के बाद सीटों में बदलाव करना कानून और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के विपरीत है.
जस्टिस सुधांशु धुलिया की अध्यक्षता वाली कमिटी ने दिया आदेश
पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश जस्टिस सुधांशु धुलिया की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय हाई-पावर्ड इलेक्शन सुपरवाइजरी कमिटी ने अपील संख्या 108/2026 की सुनवाई के बाद यह आदेश जारी किया. कमिटी में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रवि शंकर झा और वरिष्ठ अधिवक्ता वी. गिरि भी सदस्य हैं.
एडवोकेट्स एक्ट के खिलाफ बताया गया BCI का प्रस्ताव
कमिटी ने अपने आदेश में कहा कि एडवोकेट्स एक्ट, 1961 के तहत ही राज्य बार काउंसिलों में सदस्यों की संख्या निर्धारित होती है. कई राज्यों में चुनाव और मतगणना की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि अन्य राज्यों में चुनाव प्रक्रिया जारी है. ऐसे समय में सीटों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है और यह कानूनी प्रावधानों के अनुरूप नहीं है.
BCI ने कहा- यह केवल सुझाव था
सुनवाई के दौरान BCI के अतिरिक्त सचिव अवनीश पांडे ने कमिटी को बताया कि 19 जुलाई का प्रस्ताव केवल एक सुझाव था. उन्होंने कहा कि इसे कानूनी संशोधन और सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के बिना लागू नहीं किया जा सकता.
रिटर्निंग ऑफिसर्स को कार्रवाई नहीं करने का निर्देश
कमिटी ने सभी रिटर्निंग ऑफिसर्स और हाई-पावर्ड इलेक्शन कमिटियों को निर्देश दिया है कि वे BCI के 19 जुलाई के प्रस्ताव और 21 जुलाई 2026 को जारी पत्र के आधार पर किसी प्रकार की कार्रवाई न करें. साथ ही मतगणना और चुनावी प्रक्रिया 9 फरवरी 2026 को जारी सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार ही पूरी की जाए.
झारखंड में भी थमा सीट बढ़ाने का प्रस्ताव
इस आदेश का सीधा असर झारखंड स्टेट बार काउंसिल पर भी पड़ा है. यहां बार काउंसिल की सीटों की संख्या 25 से बढ़ाकर 32 करने का प्रस्ताव फिलहाल प्रभावहीन हो गया है. सुप्रीम कोर्ट की हाई-पावर्ड कमिटी के आदेश के बाद इस प्रस्ताव पर भी रोक लग गई है.