घुसपैठ से शुरू हुआ संघर्ष, ऑपरेशन विजय बना जवाब
साल 1999 की शुरुआत में पाकिस्तान समर्थित सैनिकों और घुसपैठियों ने कारगिल, द्रास, बटालिक, काकसर और मुश्कोह घाटी के कई ऊंचे इलाकों में भारतीय सीमा के भीतर रणनीतिक ठिकानों पर कब्जा करने की कोशिश की. शुरुआती दिनों में स्थानीय चरवाहों ने संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी भारतीय सेना को दी, जिसके बाद स्थिति की गंभीरता सामने आई। सेना ने बड़े स्तर पर अभियान शुरू किया, जिसे ऑपरेशन विजय नाम दिया गया. इस अभियान का उद्देश्य भारतीय क्षेत्र से सभी घुसपैठियों को खदेड़कर हर रणनीतिक चोटी पर दोबारा तिरंगा फहराना था.
स्थिति गंभीर होने पर भारतीय वायुसेना भी अभियान में शामिल हुई. 26 मई 1999 को ऑपरेशन सफेद सागर की शुरुआत हुई, जिसके तहत ऊंची पहाड़ियों पर बने दुश्मन के ठिकानों को निशाना बनाया गया. इसे दुनिया के सबसे कठिन और ऊंचाई वाले हवाई अभियानों में गिना जाता है.
टोलोलिंग और टाइगर हिल पर जीत ने बदला युद्ध का रुख
युद्ध के दौरान भारतीय सेना ने कई कठिन अभियानों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया. टोलोलिंग और टाइगर हिल जैसी रणनीतिक चोटियों पर दोबारा कब्जा भारत के लिए निर्णायक साबित हुआ. इन सफलताओं के बाद द्रास, बटालिक और आसपास के क्षेत्रों में दुश्मन की पकड़ लगातार कमजोर होती गई. भारतीय सैनिकों ने बेहद प्रतिकूल परिस्थितियों में भी अदम्य साहस का परिचय देते हुए अभियान जारी रखा.
इसी युद्ध में कैप्टन विक्रम बत्रा, लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडेय, ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव, राइफलमैन संजय कुमार समेत कई वीर सैनिकों ने असाधारण बहादुरी दिखाई. इनमें से कई जवानों को परम वीर चक्र और अन्य वीरता पुरस्कारों से सम्मानित किया गया. उनका योगदान आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है.
26 जुलाई को मिली जीत, आज भी देश करता है वीरों को नमन
लगातार सैन्य दबाव और भारतीय सेना की प्रभावी कार्रवाई के बाद पाकिस्तान को पीछे हटना पड़ा. जुलाई 1999 के मध्य तक अधिकांश रणनीतिक चोटियां भारतीय सेना के नियंत्रण में वापस आ चुकी थीं। आखिरकार 26 जुलाई 1999 को भारत ने ऑपरेशन विजय की सफलता और कारगिल युद्ध में जीत की आधिकारिक घोषणा की. इस युद्ध में 527 भारतीय सैनिकों ने सर्वोच्च बलिदान दिया और देश की सीमाओं की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया.
आज कारगिल विजय दिवस केवल एक सैन्य जीत की याद नहीं है, बल्कि यह भारतीय सेना के साहस, अनुशासन, समर्पण और राष्ट्र के प्रति अटूट निष्ठा का प्रतीक है. देशभर में इस अवसर पर शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है और नई पीढ़ी को उनके बलिदान से प्रेरणा लेने का संदेश दिया जाता है.