Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित गबन मामले के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय से जुड़ा एक अहम प्रशासनिक फैसला सामने आया है. ट्रस्ट ने उनके हस्ताक्षर वाले पहचान पत्र और एंट्री पास को अंतरिम व्यवस्था के तहत दोबारा मान्य कर दिया है, ताकि मंदिर परिसर में चल रहे निर्माण और रखरखाव के कार्य प्रभावित न हों. उधर, इस्तीफा देने के बाद चंपत राय ने देवशयनी एकादशी से चार महीने की साधना शुरू कर दी है.
निर्माण कार्य प्रभावित होने पर लिया गया फैसला
मंदिर से जुड़े सूत्रों के अनुसार, चंपत राय के हस्ताक्षर वाले ID कार्ड और एंट्री पास पहले अमान्य घोषित कर दिए गए थे. इसके बाद संग्रहालय, ट्रस्ट कार्यालय, विश्राम गृह, चारदीवारी और अन्य निर्माणाधीन परियोजनाओं के समन्वय में दिक्कतें आने लगीं. इसी स्थिति को देखते हुए ट्रस्ट ने अंतरिम व्यवस्था के तहत इन दस्तावेजों को फिर से वैध कर दिया, जिससे निर्माण और रखरखाव का काम सुचारु रूप से जारी रह सके.
इस्तीफे के बाद चार महीने की साधना और मौन व्रत
चढ़ावे से जुड़े कथित विवाद के बीच चंपत राय ने ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद उन्होंने अयोध्या में ही देवशयनी एकादशी से चार महीने की साधना शुरू की है. इस अवधि में वह प्रतिदिन सुबह 6 बजे से दोपहर 12 बजे तक छह घंटे का मौन व्रत रखेंगे. उनकी यह साधना चार महीने तक जारी रहेगी.
नई SIT कर रही जांच, आठ आरोपी गिरफ्तार
राम मंदिर के दान और चढ़ावे में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर तीन सदस्यीय नई एसआईटी का गठन किया है. जांच टीम की अगुवाई आईजी किरण एस कर रही हैं, जबकि डीआईजी सोमेन वर्मा और एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर इसके सदस्य हैं. सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकार को वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी के नेतृत्व में नई जांच टीम गठित करने और 27 जुलाई तक स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था. पुलिस के मुताबिक, मामले में अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. जांच के दौरान नकदी, वाहन, निवेश से जुड़े दस्तावेज और अन्य संपत्तियां भी बरामद की गई हैं, जिन्हें कथित तौर पर गबन की रकम से खरीदा गया बताया गया है. समाचार लिखे जाने तक जांच जारी है.