रात दो बजे से ही जलार्पण के लिए मंदिर पहुंचने लगे श्रद्धालु
श्रावणी मेला के पहले दिन सुबह 3 बजकर 02 मिनट पर बाबा बैद्यनाथ मंदिर का पट खोला गया. विशेष पूजा संपन्न होने के बाद आंतरिक और बाह्य अरघा स्थापित किया गया. बाह्य अरघा से जल चढ़ाने की इच्छा रखने वाले बड़ी संख्या में श्रद्धालु रात 2 बजे से ही मंदिर परिसर पहुंचने लगे थे. अरघा व्यवस्था शुरू होते ही कतारबद्ध श्रद्धालुओं ने बाबा भोलेनाथ का जलाभिषेक शांतिपूर्ण और सुगम तरीके से किया.
उपायुक्त और एसपी की मौजूदगी में शुरू हुई अरघा व्यवस्था
श्रद्धालुओं को बिना किसी परेशानी के सुरक्षित और सुगम जलार्पण कराने के उद्देश्य से उपायुक्त सौरभ कुमार भुवानिया और पुलिस अधीक्षक प्रवीण पुष्कर की उपस्थिति में बाबा मंदिर में अरघा स्थापित किया गया. इसके बाद सुरक्षा व्यवस्था के बीच जलाभिषेक की प्रक्रिया शुरू हुई और श्रद्धालु निर्धारित कतार से बाबा के दरबार तक पहुंचते रहे.
कंट्रोल रूम से हर पल रखी गई भीड़ और सुरक्षा पर नजर
श्रावणी मेला के पहले दिन व्यवस्था का जायजा लेने के लिए उपायुक्त सौरभ कुमार भुवानिया ने बाबा मंदिर स्थित कंट्रोल रूम का निरीक्षण किया. यहां लगे सीसीटीवी कैमरों के जरिए मंदिर परिसर. गर्भगृह. निकास द्वार और अन्य संवेदनशील स्थानों की लाइव निगरानी की गई. कंट्रोल रूम में तैनात अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे भीड़ की स्थिति पर लगातार नजर रखें और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करें.
ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों को सेवा भाव और विनम्रता से काम करने का निर्देश
निरीक्षण के दौरान उपायुक्त सौरभ कुमार भुवानिया और पुलिस अधीक्षक प्रवीण पुष्कर ने ड्यूटी पर मौजूद दंडाधिकारियों और पुलिस अधिकारियों से कहा कि वे सेवा भाव के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाएं. साथ ही देवघर आने वाले सभी कांवरियों और श्रद्धालुओं के साथ विनम्र व्यवहार करें. ताकि देश विदेश से बाबा के दर्शन के लिए आने वाले भक्त अपने साथ एक सुखद और यादगार अनुभव लेकर लौटें.
श्रद्धा और बेहतर व्यवस्था के साथ शुरू हुआ श्रावणी मेले का पावन सफर
श्रावणी मेला के पहले दिन बाबा बैद्यनाथ धाम में आस्था. भक्ति और बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था का सुंदर संगम देखने को मिला. श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ बाबा भोलेनाथ का जलाभिषेक किया. वहीं प्रशासन ने भी सुरक्षा. भीड़ प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुविधा को लेकर पूरी सतर्कता बरती. ताकि मेले की शुरुआत शांतिपूर्ण और व्यवस्थित माहौल में हो सके.