Ranchi News : झारखंड सरकार ने पथ निर्माण विभाग के सेवानिवृत्त सहायक निदेशक (गुण नियंत्रण) राज किशोर प्रसाद के खिलाफ जारी सभी दंडात्मक आदेश वापस लेने का फैसला किया है। यह निर्णय झारखंड हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में लिया गया है। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर करेगी।
2008 में शुरू हुई थी विभागीय कार्रवाई
राज किशोर प्रसाद के खिलाफ वर्ष 2008 में विभागीय कार्रवाई शुरू की गई थी। जांच पूरी होने के बाद वर्ष 2013 में उन्हें दंडित किया गया। इसके बाद उन्होंने विभागीय अपील दायर की, लेकिन वर्ष 2014 में वह भी खारिज कर दी गई।
हाईकोर्ट और एलपीए में सरकार को नहीं मिली राहत
दंडात्मक कार्रवाई को चुनौती देते हुए राज किशोर प्रसाद ने झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर की। वर्ष 2023 में हाईकोर्ट ने विभाग द्वारा जारी दोनों दंडात्मक आदेशों को रद्द कर दिया। इसके बाद राज्य सरकार ने इस फैसले को लेटर्स पेटेंट अपील (LPA) के माध्यम से चुनौती दी, लेकिन वर्ष 2025 में हाईकोर्ट ने एलपीए भी खारिज कर दी।
अवमानना याचिका के बाद सरकार ने वापस लिए आदेश
हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर संबंधित पक्ष की ओर से अवमानना याचिका दायर की गई। इसके बाद राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में राज किशोर प्रसाद के खिलाफ जारी सभी दंडात्मक आदेश वापस लेने का निर्णय लिया गया।
राज्य सरकार ने कहा है कि हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की जाएगी। सरकार का कहना है कि इस मामले में अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ही माना जाएगा।