Jharkhand High Court: रामगढ़ की औद्योगिक इकाइयों से होने वाले प्रदूषण की अब नियमित निगरानी होगी. झारखंड हाईकोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को बिहार फाउंड्री एंड कास्टिंग लिमिटेड और दयाल स्टील लिमिटेड की साल में दो बार जांच करने का निर्देश दिया है. रामकिशोर की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने इन निर्देशों के साथ मामले का निष्पादन कर दिया.
एक जांच बिना सूचना के होगी
हाईकोर्ट ने कहा कि दोनों कंपनियों की हर साल दो बार जांच की जाए. इनमें कम से कम एक जांच बिना पूर्व सूचना के करनी होगी. जांच के दौरान फैक्ट्रियों की चिमनी से निकलने वाले धुएं, गंदे पानी और प्रदूषण रोकने के लिए किए जा रहे इंतजामों की स्थिति देखी जाएगी.
48 घंटे तक प्रदूषण बढ़ा तो नोटिस
कोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को दोनों कंपनियों पर लगातार नजर रखने का निर्देश दिया है. अगर किसी कंपनी में प्रदूषण का स्तर तय सीमा से लगातार 48 घंटे से ज्यादा समय तक अधिक पाया जाता है, तो बोर्ड को सात दिनों के भीतर कारण बताओ नोटिस जारी करना होगा. इसके बाद संबंधित कंपनी को अपना जवाब देने के लिए 15 दिनों का समय मिलेगा.
स्कूल के आसपास पानी की भी जांच
VIVA इंटरनेशनल स्कूल के आसपास पानी की गुणवत्ता की दोबारा जांच करने का निर्देश भी दिया गया है. तीन महीने के भीतर मान्यता प्राप्त लैब से पानी के नमूने लिए जाएंगे. दामोदर नदी के आसपास भी जरूरत के अनुसार पानी की जांच की जाएगी. जांच में अगर औद्योगिक इकाइयों से प्रदूषण की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.
कंपनियों की अलग-अलग फाइल रखने का निर्देश
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को दोनों कंपनियों की अलग-अलग फाइल तैयार करने को कहा गया है. इसमें पर्यावरण मंजूरी, पिछली जांच रिपोर्ट और अन्य जरूरी दस्तावेज रखने होंगे.
बोर्ड को चार महीने के भीतर हाईकोर्ट में अनुपालन रिपोर्ट भी दाखिल करनी होगी.
फिलहाल लगातार नियम तोड़ने का प्रमाण नहीं
हाईकोर्ट ने कहा कि अभी दोनों कंपनियों की ओर से लगातार पर्यावरण नियमों का उल्लंघन किए जाने का पुख्ता प्रमाण सामने नहीं आया है. हालांकि, VIVA इंटरनेशनल स्कूल के आसपास के पानी में फ्लोराइड, टीडीएस और नाइट्रेट की मात्रा थोड़ी अधिक पाई गई थी. यह प्रदूषण औद्योगिक इकाइयों की वजह से है या किसी अन्य स्रोत से, इसका पता आगे की जांच के बाद ही चलेगा.