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  • 2026-07-30

Jamshedpur News: जमशेदपुर में "नन्हें स्वर" कार्यक्रम के जरिए बच्चों ने सीखे मुंशी प्रेमचंद के मानवीय मूल्य और सामाजिक संदेश

Jamshedpur News: मुंशी प्रेमचंद की जयंती के पूर्व दिवस पर जमशेदपुर के केबुल बस्ती स्थित सी पी समिति मध्य विद्यालय में निनाद संस्था की ओर से "नन्हें स्वर" कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को साहित्य, संस्कृति और भारतीय मूल्यों से जोड़ना था. इस दौरान विद्यार्थियों ने कविता, काव्य और कहानी पाठ के माध्यम से मुंशी प्रेमचंद के जीवन और साहित्य को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया.
मां सरस्वती और मुंशी प्रेमचंद को श्रद्धांजलि देकर हुई कार्यक्रम की शुरुआत
कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के प्रधानाध्यापक अमित कुमार सिंह ने की. शुरुआत मां सरस्वती और मुंशी प्रेमचंद के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलित कर तथा पुष्पांजलि अर्पित करके की गई. इसके बाद कक्षा छह से दसवीं तक के विद्यार्थियों ने मुंशी प्रेमचंद के जीवन और साहित्य पर आधारित अपनी प्रस्तुतियां दीं. प्रतियोगिता में कक्षा सात की आयुषी यादव ने पहला, कक्षा नौ के समर कुमार ने दूसरा और कक्षा छह की जिया कुमारी ने तीसरा स्थान प्राप्त किया. विजेताओं के साथ सभी प्रतिभागी विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया.


गोदान से लेकर कफन तक की रचनाओं ने बच्चों को मानवीय मूल्यों से जोड़ा
विद्यार्थियों ने मुंशी प्रेमचंद के जीवन परिचय के साथ उनकी प्रसिद्ध रचनाओं "गोदान", "गबन", "ईदगाह", "नमक का दरोगा", "पंच परमेश्वर", "पूस की रात" और "कफन" का प्रभावशाली पाठ किया. इन प्रस्तुतियों ने उपस्थित शिक्षकों और विद्यार्थियों को साहित्य में निहित मानवीय मूल्यों और सामाजिक संवेदनाओं से जोड़ने का काम किया.


डिजिटल दौर में बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करना जरूरी है
विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष दिनेश कुमार ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद केवल साहित्यकार नहीं थे, बल्कि भारतीय समाज के सच्चे दर्पण थे. उन्होंने अपने लेखन के माध्यम से समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े लोगों की पीड़ा, संघर्ष और संवेदनाओं को आवाज दी. उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में बच्चों के भीतर पुस्तक पढ़ने की रुचि विकसित करना समय की जरूरत है. ऐसे साहित्यिक कार्यक्रम विद्यार्थियों में भाषा, संस्कार, संवेदनशीलता और आत्मविश्वास को मजबूत करते हैं. उन्होंने सभी प्रतिभागियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं भी दीं.


बच्चों को साहित्य और भारतीय मूल्यों से जोड़ना ही संस्था का उद्देश्य है, बोलीं पूनम महानंद
निनाद संस्था की संस्थापक पूनम महानंद ने कहा कि संस्था का उद्देश्य बच्चों को साहित्य, संस्कृति और भारतीय मूल्यों से जोड़ना है. उन्होंने कहा कि मुंशी प्रेमचंद का साहित्य आज भी पूरी तरह प्रासंगिक है, क्योंकि उनकी रचनाएं ईमानदारी, सामाजिक समानता, करुणा और मानवता का संदेश देती हैं. ऐसे आयोजन बच्चों की रचनात्मक प्रतिभा को निखारने के साथ साथ उनमें पढ़ने और सीखने की सकारात्मक संस्कृति भी विकसित करते हैं.


शिक्षकों, पदाधिकारियों और विद्यार्थियों की मौजूदगी में हुआ कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम के सफल संचालन में विद्यालय प्रबंधन समिति के महासचिव परमानंद कौशल, उपाध्यक्ष सालिक दास देवांगन तथा निनाद संस्था की आकांक्षा, चंद्रमोहन सोरेन, हिमांशु और शुभम कुमार पांडेय ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. प्रतियोगिता के निर्णायक के रूप में मनीष सिंह "वंदन" उपस्थित रहे. इस अवसर पर विद्यालय की अंग्रेजी माध्यम शाखा की प्रधानाध्यापिका लुबना नूर खान भी मौजूद रहीं. कार्यक्रम में कौशिक दत्ता, अर्चना सिंह, त्रिलोचन कौर, सीमा, संगीता मेरी सोरेन, हीरादास मानिकपुरी, अनुसियां कुमारी, रेखा कुमारी, तारकेश्वरी देवी, सुमन सिंह, अनुष्का सिंह, रिचा मिश्रा, मेनका कुमारी, सुमन कुमारी, रीता शर्मा, कृतिका सिंह, सोनम शर्मा सहित विद्यालय के सभी शिक्षक शिक्षिकाएं और बड़ी संख्या में विद्यार्थी शामिल हुए. कार्यक्रम का समापन सभी प्रतिभागियों के सम्मान और राष्ट्रगान के साथ किया गया.
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