Ranchi News: बैंक ऑफ इंडिया की रातू रोड शाखा ने एक फ्लैट को लेकर बड़े फर्जीवाड़े का मामला दर्ज कराया है. बैंक का आरोप है कि जिस फ्लैट को होम लोन के बदले बैंक के पास गिरवी रखा गया था, उसे बिना बैंक की अनुमति के बेच दिया गया. इतना ही नहीं, बाद में उसी फ्लैट की दोबारा बिक्री कर दूसरे वित्तीय संस्थान से भी लोन ले लिया गया.
2012 में लिया था होम लोन
बैंक ऑफ इंडिया के मुख्य प्रबंधक आनंद कौशल ने लालपुर थाना में दर्ज शिकायत में बताया कि वर्ष 2012 में सुलोचना केशरी और रंजीत प्रसाद केशरी ने स्टार होम लोन योजना के तहत ऋण लिया था. इसके बदले लालपुर स्थित मधुरेनो अपार्टमेंट का फ्लैट नंबर-104 बैंक के पास गिरवी रखा गया था.
बैंक के अनुसार, समय पर लोन की किस्त नहीं चुकाने के कारण वर्ष 2020 में खाते को एनपीए घोषित कर दिया गया.
बैंक के कब्जे के बाद भी बेच दिया फ्लैट
शिकायत में कहा गया है कि सितंबर 2025 में सरफेसी अधिनियम के तहत बैंक ने दंडाधिकारी और पुलिस की मौजूदगी में फ्लैट पर कब्जा कर लिया था. फ्लैट को सील कर उसकी चाबी बैंक के पास रखी गई थी.
कुछ समय बाद जब बैंक ने निरीक्षण किया तो फ्लैट की सील टूटी हुई मिली और बैंक का नोटिस भी हटा दिया गया था.
एक ही फ्लैट की दो बार हुई बिक्री
बैंक का आरोप है कि आरोपियों ने बिना एनओसी लिए पहले वर्ष 2021 में फ्लैट विकास शर्मा को बेच दिया. इसके बाद वर्ष 2024 में विकास शर्मा ने यही फ्लैट रितेश कुमार मिश्रा को बेच दिया.
दूसरी कंपनी से भी लिया गया लोन
एफआईआर के मुताबिक, रितेश कुमार मिश्रा ने इसी फ्लैट के दस्तावेज के आधार पर टाटा कैपिटल हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड से भी होम लोन ले लिया.
इस मामले में बैंक ने सुलोचना केशरी, रंजीत प्रसाद केशरी, विकास शर्मा, रितेश कुमार मिश्रा, टाटा कैपिटल हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड के संबंधित अधिकारियों और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक साजिश समेत कई धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराई है. पुलिस मामले की जांच में जुट गई है.