Brij Bhushan Acquitted: भारतीय कुश्ती संघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष और बीजेपी के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह को अदालत से बड़ी राहत मिल गई है. महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों के मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें पूरी तरह से बरी कर दिया है. अदालत के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) अश्विनी पंवार ने सोमवार को इस बहुचर्चित मामले में फैसला सुनाया.
अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह के साथ सह-आरोपी और डब्ल्यूएफआई के पूर्व असिस्टेंट सेक्रेटरी विनोद तोमर को भी सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया. गौरतलब है कि राउज एवेन्यू कोर्ट ने इस पूरे मामले में सुनवाई पूरी करने के बाद बीते 2 जुलाई को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.
बरी होते ही बोले बृजभूषण सिंह:- "आरोप साबित होता तो फांसी लगा लेता"
सोमवार सुबह फैसले से पहले जब बृजभूषण शरण सिंह कोर्ट पहुंचे, तो उन्होंने मीडिया से सिर्फ इतना कहा कि "जो कहेगा कोर्ट कहेगा, हम अभी कुछ नहीं बोलेंगे." लेकिन अदालत से सम्मानपूर्वक बरी होने के तुरंत बाद उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए अपना पुराना बयान याद दिलाया. उन्होंने कहा, "मैंने पहले ही दिन कहा था कि अगर मुझ पर लगा एक भी आरोप साबित हो जाता है, तो मैं फांसी लगा लूंगा." बृजभूषण सिंह ने आगे कहा, "आज अदालत ने मुझे सम्मान के साथ बरी कर दिया है, जो मेरे और मेरे सभी समर्थकों के लिए बहुत खुशी का दिन है."
साक्षी, बजरंग और विनेश ने जंतर-मंतर से शुरू किया था आंदोलन
यह पूरा विवाद छह महिला पहलवानों द्वारा पूर्व सांसद पर लगाए गए यौन उत्पीड़न और पद के दुरुपयोग के आरोपों से शुरू हुआ था. जनवरी 2023 में दिल्ली में जब नए संसद भवन का उद्घाटन हो रहा था, उसी दौरान जंतर-मंतर पर पहलवानों का ऐतिहासिक धरना शुरू हुआ. ओलंपिक पदक विजेता साक्षी मलिक, बजरंग पुनिया और विनेश फोगाट ने मोर्चा संभालते हुए बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ मोर्चा खोला था. पहलवानों के भारी विरोध और शिकायत के बाद दिल्ली पुलिस ने बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी.
जून 2023 में दाखिल हुई थी चार्जशीट, पोक्सो मामला पहले ही हो गया था बंद
दिल्ली पुलिस ने मामले की गहन जांच के बाद जून 2023 में कोर्ट में आरोप-पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया था. इसके बाद मई 2024 में ट्रायल कोर्ट ने 5 महिला पहलवानों के उत्पीड़न से जुड़ी धाराओं में बृजभूषण शरण सिंह पर आधिकारिक रूप से आरोप तय किए थे. इस मामले में शुरुआत में एक नाबालिग पहलवान ने भी पोक्सो एक्ट (POCSO Act) के तहत गंभीर आरोप लगाए थे.
हालांकि, बाद में नाबालिग पहलवान ने अपनी शिकायत वापस ले ली थी. शिकायत वापस लेने के बाद दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में कैंसिलेशन रिपोर्ट दाखिल कर दी थी, जिसके बाद पोक्सो का मामला बंद हो गया था.