FSSAI Ban Alcohol Brands: भारत के खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने देश के कई मशहूर शराब ब्रांड्स के चुनिंदा वैरिएंट्स की बिक्री पर रोक लगा दी है. गुणवत्ता जांच के दौरान इन उत्पादों में ऐसे कृत्रिम और कुदरती जैसे दिखने वाले फ्लेवर्स पाए गए, जो तय खाद्य मानकों के अनुरूप नहीं थे.
मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में इन ब्रांड्स पर लगा प्रतिबंध
प्राधिकरण की इस कार्रवाई का असर कई दिग्गज कंपनियों के लोकप्रिय ब्रांड्स पर पड़ा है. मध्य प्रदेश में यूनाइटेड स्पिरिट्स की एंटीक्विटी ब्लू व्हिस्की और रॉयल चैलेंज व्हिस्की की बिक्री रोक दी गई है. इसके अलावा इनब्रू बेवरेजेज की बैगपाइपर डीलक्स व्हिस्की और ओल्ड कास्क डीलक्स x x x रम पर भी बैन लगाया गया है.
वहीं महाराष्ट्र में मोहन रॉकी स्प्रिंगवॉटर द्वारा निर्मित ओल्ड मोंक रम के तीन अलग-अलग वैरिएंट्स की बिक्री पर रोक लगाई गई है. हालांकि, अभी तक यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सका है कि यह प्रतिबंध केवल इन राज्यों में बने स्टॉक पर ही प्रभावी रहेगा या देश के अन्य हिस्सों में निर्मित उत्पादों पर भी इसका असर दिखेगा.
लैब जांच में नियमों के उल्लंघन का खुलासा
FSSAI द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, लैब टेस्टिंग में यह बात सामने आई कि इन पेय पदार्थों में शराब जैसी प्राकृतिक महक और स्वाद पैदा करने के लिए ऊपर से अलग से फ्लेवर मिलाए गए थे. भारतीय खाद्य सुरक्षा कानूनों के मुताबिक, इन उत्पादों को तैयार करने में केवल प्राकृतिक घटकों और निर्धारित फर्मेंटेशन (पकाने) प्रक्रिया का ही उपयोग होना चाहिए.
जांच रिपोर्ट में पाया गया कि रम में रम का फ्लेवर और व्हिस्की में अलग से व्हिस्की का स्वाद जोड़ा गया था. भारतीय नियम और मानक इस तरह से ऊपर से फ्लेवर मिलाए जाने की अनुमति बिल्कुल नहीं देते हैं.
घरेलू शराब बाजार और FSSAI की सख्ती
भारत का मदिरा बाजार दुनिया के सबसे विशाल बाजारों में से एक माना जाता है, जिसका वार्षिक कारोबार लगभग 40 अरब डॉलर के आसपास है. इस कार्रवाई की जद में आए सभी प्रमुख ब्रांड्स का निर्माण देश के भीतर ही किया जाता है और ये विदेशी स्कॉच या प्रीमियम रम की तुलना में काफी किफायती और लोकप्रिय विकल्प हैं. FSSAI की यह कड़ी कार्रवाई ऐसे समय में सामने आई है जब नियामक निकाय देशभर में खाद्य और पेय पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर व्यापक स्तर पर जांच अभियान चला रहा है.