Chandil: सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल प्रखंड अंतर्गत भादुडीह पंचायत के हामसादा गांव में आंगनबाड़ी सेविका चयन प्रक्रिया के दौरान एक दावेदार के पति के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया है। घटना के बाद ग्रामीणों ने चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए प्रशासन से पूरे मामले की जांच कराने और जरूरत पड़ने पर चयन प्रक्रिया दोबारा कराने की मांग की है।
चयन स्थल पर विवाद और मारपीट का आरोप
जानकारी के अनुसार, आंगनबाड़ी सेविका पद के चयन के लिए आयोजित प्रक्रिया में प्रकाश मार्डी भी मौजूद थे। उनका आरोप है कि चयन के दौरान पूर्व सेविका के परिवार से जुड़े एक व्यक्ति के साथ उनका विवाद हुआ और कथित तौर पर चप्पल से मारपीट की गई। प्रकाश मार्डी ने गंभीर मारपीट करने और काटने का प्रयास किए जाने का भी आरोप लगाया है। प्रकाश मार्डी के अनुसार, मामले में पूर्व सेविका के भाई राजेश बेसरा का नाम सामने आया है। उनका दावा है कि इससे पहले भी उन्हें अपनी पत्नी की उम्मीदवारी से पीछे हटने के लिए दबाव दिया गया था। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
पत्नी सेविका पद की अभ्यर्थी
बताया गया कि प्रकाश मार्डी की पत्नी तुलसी हांसदा आंगनबाड़ी सेविका पद की अभ्यर्थी हैं। उन्होंने स्नातकोत्तर तक पढ़ाई की है। आरोप है कि चयन प्रक्रिया के दौरान प्रतिद्वंद्वी दावेदारी को लेकर विवाद बढ़ा और इसी दौरान मारपीट की घटना हुई। घटना के बाद ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि यदि चयन स्थल पर किसी दावेदार से जुड़े व्यक्ति के साथ कथित मारपीट होती है, तो ऐसे माहौल में निष्पक्ष चयन कैसे सुनिश्चित किया जा सकता है।
चयन प्रक्रिया की जांच और दोबारा कराने की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि आंगनबाड़ी सेविका का चयन पारदर्शी और निर्धारित नियमों के अनुसार होना चाहिए। उन्होंने प्रशासन से हामसादा गांव में हुई चयन प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों ने कहा कि यदि जांच में चयन प्रक्रिया प्रभावित होने की पुष्टि होती है, तो मौजूदा चयन को रद्द कर सभी पात्र अभ्यर्थियों को समान अवसर देते हुए दोबारा प्रक्रिया कराई जाए।
सीडीपीओ की कार्यशैली पर भी सवाल
मामले को लेकर कुछ ग्रामीणों ने संबंधित सीडीपीओ की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि क्षेत्र में आंगनबाड़ी सेविका चयन को लेकर पहले भी शिकायतें सामने आती रही हैं। कुछ लोगों ने चयन प्रक्रिया में कथित अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ग्रामीणों ने पूरे मामले के साथ पूर्व की शिकायतों की भी जांच कराने की मांग की है।
आधिकारिक बयान का इंतजार
कथित मारपीट और चयन प्रक्रिया को लेकर समाचार लिखे जाने तक पुलिस अथवा महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में लगाए गए आरोपों की वास्तविक स्थिति संबंधित पक्षों के बयान और जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल ग्रामीण प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और चयन प्रक्रिया में किसी तरह की गड़बड़ी पाए जाने पर नियमानुसार दोबारा चयन कराने की मांग कर रहे हैं।