Parliament: संसद के मानसून सत्र के दौरान सोमवार को विपक्ष के हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही प्रभावित रही. शोर-शराबे के बीच सदन को मंगलवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया. इसी बीच JPSC परीक्षाओं को लेकर रांची में चल रहे छात्र आंदोलन का मुद्दा भी संसद परिसर में राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा बना.
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि केंद्र सरकार छात्र आंदोलनों और उनसे जुड़े सभी मुद्दों पर सदन में विस्तार से चर्चा के लिए तैयार है. उन्होंने विपक्ष से अपील की कि चर्चा के दौरान सदन की कार्यवाही बाधित नहीं होनी चाहिए और सरकार तथा गृह मंत्री का पक्ष भी पूरा सुना जाना चाहिए.
JPSC आंदोलन को लेकर भाजपा का कांग्रेस पर हमला
भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने झारखंड में चल रहे JPSC विवाद को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि यदि राहुल गांधी छात्रों और युवाओं के मुद्दों को लेकर गंभीर हैं, तो उन्हें रांची में चल रहे अभ्यर्थियों के आंदोलन पर भी ध्यान देना चाहिए.
उन्होंने दावा किया कि झारखंड में छात्र पिछले 17 दिनों से आंदोलन और भूख हड़ताल कर रहे हैं. सोमवार को राज्य के अलग-अलग हिस्सों से युवा रांची में विधानसभा की ओर मार्च कर रहे हैं. जगदंबिका पाल ने विपक्ष पर संसद की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जनता ने सांसदों को देश से जुड़े मुद्दों पर चर्चा और काम करने के लिए चुना है. भाजपा सांसद ने राहुल गांधी के साथ अखिलेश यादव और विपक्षी दलों पर भी संसद के मानसून सत्र को बाधित करने का आरोप लगाया.
प्रियंका गांधी ने अमित शाह से बयान की मांग की
दूसरी ओर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि संसद में सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध तब तक खत्म नहीं होगा, जब तक केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह छात्रों पर पुलिस की कथित कार्रवाई को लेकर सदन में बयान नहीं देते.
प्रियंका गांधी ने संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि गृह मंत्री के बयान के बाद ही गतिरोध खत्म होने की संभावना है. उन्होंने यह बात ऐसे समय कही है जब मानसून सत्र समाप्त होने में अब केवल चार दिन बचे हैं.
संसद में जारी गतिरोध के बीच महिला आरक्षण, परिसीमन और विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम यानी FCRA से जुड़े प्रस्तावित विधेयकों को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है. सोमवार की लोकसभा कार्यसूची में इनमें से कोई भी विधेयक शामिल नहीं था.
लोकसभा में केरलम नाम बदलने का विधेयक पेश
संसद में जारी हंगामे के बीच केंद्र सरकार ने लोकसभा में "केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026" पेश किया. विधेयक का उद्देश्य राज्य का आधिकारिक नाम "केरल" से बदलकर "केरलम" करना है.
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने विपक्ष के विरोध और हंगामे के बीच विधेयक सदन में पेश किया. प्रस्तावित बदलाव के लिए संविधान की पहली अनुसूची में संशोधन किया जाना है. इसके तहत "Kerala" की जगह "Keralam" नाम दर्ज किया जाएगा.
केरल विधानसभा पहले ही दे चुकी है सहमति
राज्य के नाम में बदलाव का प्रस्ताव नया नहीं है. केरल विधानसभा ने करीब दो साल पहले राज्य का नाम "केरलम" करने के समर्थन में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया था. राज्य सरकार ने जून 2024 में यह प्रस्ताव केंद्र को भेजा था. इसके बाद राष्ट्रपति की ओर से नाम परिवर्तन से जुड़े विधेयक को राज्य विधानसभा के पास उसकी राय जानने के लिए भेजा गया. विधानसभा ने दोबारा विचार के बाद भी नाम बदलने के प्रस्ताव का समर्थन किया. अब केंद्र सरकार ने संवैधानिक प्रक्रिया के तहत लोकसभा में विधेयक पेश किया है. इसमें संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत राज्य का नाम बदलने और पहली अनुसूची में आवश्यक संशोधन का प्रस्ताव रखा गया है.
संसद में हंगामा और राजनीतिक टकराव जारी
सोमवार की कार्यवाही में एक तरफ छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने दिखे, वहीं दूसरी ओर सरकार ने केरल का नाम बदलने से संबंधित विधेयक सदन में पेश किया. मानसून सत्र के अंतिम दिनों में विपक्ष और सरकार के बीच जारी गतिरोध के कारण कई महत्वपूर्ण विधायी कार्यों को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है.