Mining Amendment Bill: खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर झारखंड सरकार ने केंद्र के सामने विरोध दर्ज कराया है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 13 अगस्त को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर विधेयक की कई धाराओं पर दोबारा विचार करने की मांग की है. मुख्यमंत्री का कहना है कि प्रस्तावित कानून से राज्यों के संवैधानिक और आर्थिक अधिकार प्रभावित हो सकते हैं.
धारा 9D पर सबसे बड़ी आपत्ति
हेमंत सोरेन ने पत्र में खास तौर पर प्रस्तावित धारा 9D का विरोध किया है. उन्होंने कहा कि इस प्रावधान से राज्य सरकारों का खनिज वाली जमीन पर टैक्स, उपकर और अन्य लेवी लगाने का अधिकार सीमित हो सकता है. झारखंड सरकार ने मांग की है कि खनिज युक्त भूमि को इस धारा के दायरे से बाहर रखा जाए.
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला
मुख्यमंत्री ने 25 जुलाई 2024 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी जिक्र किया है. उन्होंने कहा कि अदालत ने राज्यों के खनिज और खदान वाली जमीन पर कर लगाने के अधिकार को महत्वपूर्ण माना था. ऐसे में नया कानून उस अधिकार को कमजोर नहीं करना चाहिए.
राज्य के राजस्व पर पड़ सकता है असर
सरकार के मुताबिक, झारखंड की आय में खनन का बड़ा योगदान है. आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, वर्ष 2024-25 में राज्य के गैर-कर राजस्व का करीब 84.9 प्रतिशत हिस्सा खनन से आया था.
झारखंड सरकार का अनुमान है कि झारखंड खनिज युक्त भूमि उपकर अधिनियम, 2024 से हर साल करीब 11 हजार करोड़ रुपये का राजस्व मिल सकता है.
इन योजनाओं का भी किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने कहा कि खनिज से मिलने वाली आय कई जनकल्याणकारी योजनाओं का आधार है. इनमें शामिल हैं:
- मंईयां सम्मान योजना
- स्वास्थ्य योजनाएं
- शिक्षा
- सामाजिक सुरक्षा
- सड़क और पेयजल परियोजनाएं
- कृषि विकास
उन्होंने कहा कि यदि खनन से मिलने वाला राजस्व घटा तो इन योजनाओं पर सीधा असर पड़ेगा.
खनन प्रभावित लोगों के लिए उठाई आवाज
हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड वर्षों से देश को अपनी खनिज संपदा देता आया है, लेकिन इसकी कीमत राज्य के लोगों ने विस्थापन, प्रदूषण और पर्यावरणीय नुकसान के रूप में चुकाई है. उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील की कि विधेयक की विवादित धाराओं पर दोबारा विचार किया जाए और राज्यों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए.