12 घायल श्रमिकों का इलाज जारी, एनडीआरएफ की टीमें तैनात
इस हादसे में घायल हुए 12 मजदूरों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है. अधिकारियों के अनुसार, 10 घायलों को गोपेश्वर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि एक-एक घायल का इलाज श्रीनगर और पीपलकोटी में चल रहा है. एक श्रमिक को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है. सुरंग में फंसे 6 लापता मजदूरों को तलाशने के लिए नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (NDRF) और स्थानीय प्रशासन की टीमें लगातार संघर्ष कर रही हैं.
ऑक्सीजन की कमी और दलदल बना बचाव कार्य में रोड़ा
एनडीआरएफ के सहायक कमांडेंट आलोक जायरा के अनुसार, सुरंग के भीतर पानी और गाद (दलदल) का भारी जमाव हो गया है. इससे बचाव कर्मियों को आगे बढ़ने में गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. इसके अलावा, सुरंग के अंदर ऑक्सीजन की घटती मात्रा रेस्क्यू टीम के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है. रात के समय अत्यधिक जोखिम के कारण अभियान को कुछ समय के लिए स्थगित करना पड़ा था, जिसे शुक्रवार सुबह स्थिति की समीक्षा के बाद दोबारा शुरू किया गया.
13 अगस्त की शाम को हुआ था हादसा, कई राज्यों के श्रमिक थे मौजूद
यह दुर्घटना 13 अगस्त की शाम लगभग 6:45 बजे घटी थी. उस समय 3.5 किलोमीटर लंबी इस सुरंग के भीतर 25 से अधिक मजदूर काम कर रहे थे, जिनमें बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ के श्रमिक शामिल थे. 444 मेगावाट क्षमता वाली इस जलविद्युत परियोजना का निर्माण टीएचडीसी (THDC) और एनटीपीसी (NTPC) द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है, जिसका लगभग 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है.
अचानक धमाका हुआ और मलबा आ गिरा - प्रत्यक्षदर्शी ने सुनाई आपबीती
हादसे में घायल झारखंड निवासी निस्तरा भिंगरा ने अस्पताल से घटना का भयावह मंजर बयां किया. उन्होंने बताया कि वे प्रवेश द्वार से करीब 1.8 किलोमीटर अंदर पैकिंग के काम में लगे थे. तभी अचानक एक तेज आवाज हुई और पानी के साथ मलबा तेजी से उनकी ओर आया. मलबे और पानी के तेज बहाव के कारण मजदूर अलग-अलग दिशाओं में बह गए. निस्तरा किसी तरह मलबे से बाहर निकलने में सफल रहे, जिसके बाद उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया.
सभी संसाधनों के साथ अंतिम चरण में रेस्क्यू
फिलहाल राहत और बचाव दल सुरंग से पानी व मलबे को बाहर निकालकर अंदर तक पहुंचने का सुरक्षित रास्ता बनाने में जुटे हैं. प्रशासन का पूरा ध्यान बचे हुए 6 मजदूरों तक जल्द से जल्द पहुंचने और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने पर केंद्रित है.